UGC : विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों के प्रमोशन को लेकर यूजीसी की नई गाइडलाइन जारी

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बीआरए बिहार विवि समेत सभी विश्वविद्यालयों में समान अवसर केंद्र स्थापित होंगे। इसका निर्देश यूजीसी ने जारी किया है। उसने विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों के प्रमोशन को लेकर नया दिशा-निर्देश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि विवि में प्रोन्नति के लिए सभी वर्गों को समान अवसर दिए जाएंगे। इसलिए विश्वविद्यालयों में समान अवसर केंद्र का गठन किया जाएगा।

केंद्र यह निगरानी भी करेगा कि विश्वविद्यायलों में जाति, धर्म, लिंग और दिव्यांगता के आधार पर किसी भी शिक्षक या कर्मचारियों के साथ भेदभाव तो नहीं हो रहा है। विवि के केंद्र के संचालन के लिए एक कमेटी का गठन भी किया जाएगा। इस कमेटी के अध्यक्ष विवि के कुलपति होंगे। इसके अलावा तीन वरिष्ठ प्राध्यापक के साथ जिला प्रशासन के अधिकारी भी इस कमेटी में शामिल होंगे। कमेटी में पुलिस और स्थानीय गणमान्य नागरिक को भी शामिल किया जाएगा। किसी भी शिक्षक के प्रमोशन की प्रक्रिया की समान अवसर केंद्र निगरानी करेगी। कमेटी के सदस्यों की कार्य अवधि दो वर्ष तक रहेगी। कमेटी में विशेष आमंत्रित सदस्य भी रहेंगे, उनकी कार्य अवधि एक वर्ष की होगी।

जिला विधिक सेवा से भी संपर्क में रहेगा केंद्र : यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि यह केंद्र स्थानीय जिला विधिक सेवा से भी संपर्क में रहेगा। अगर किसी शिक्षक या कर्मचारी को लगता है कि प्रमोशन में उसके साथ भेदभाव किया गया है तो केंद्र इस मामले में विधिक सेवा को भी शामिल कर सकता है। जिला विधिक सेवा इस मामले में होने वाले कानूनी पक्षों की पड़ताल करेगी।

केंद्र को शिकायत की जांच का रहेगा अधिकार
राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में खुलने वाले समान अवसर केंद्र को किसी भी शिकायत की जांच का भी अधिकार रहेगा। केंद्र प्रमोशन में भेदभाव लगाने वाले शिक्षक के विभागाध्यक्ष से इस मामले में जानकारी हासिल करेगा। केंद्र में जांच के लिए एक कमेटी भी बनेगी। इस कमेटी में कुलपति, शिक्षक, दो छात्र भी शामिल होंगे। इसके अलावा कमेटी में एक पिछड़ा और एक दिव्यांग सदस्य को भी शामिल करना अनिवार्य किया गया है। जांच के लिए एक हेल्पलाइन भी शुरू किया जाएगा। अगर किसी शिक्षक को भेदभाव की शिकायत करनी है तो उसे ऑनलाइन आवेदन करना होगा।