नासा ने रच दिया इतिहास, चांद से धरती पर आर्टेमिस-2 की ‘फायरिंग’ लैंडिंग; 40000 KM की थी रफ्तार

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वाशिंगटन : अमेरिकी नौसेना (US Navy) और नासा (NASA) की रिकवरी टीमों ने तुरंत कैप्सूल को सुरक्षित घेरे में ले लिया। यान से बाहर निकलते समय चारों अंतरिक्ष यात्रियों (astronauts) के चेहरों पर जीत की मुस्कान थी, जो 10 दिनों की इस उच्च-जोखिम वाली यात्रा की सफलता की कहानी बयां कर रही थी।

करीब 50 से अधिक वर्षों के लंबे इंतजार के बाद इंसान एक बार फिर चंद्रमा के करीब जाकर सुरक्षित वापस लौट आया है। नासा के आर्टेमिस II मिशन के चार अंतरिक्ष यात्री कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसन पृथ्वी से 4,06,778 किलोमीटर की रिकॉर्ड दूरी तय कर वापस लौटे हैं। यह अब तक की सबसे लंबी मानव अंतरिक्ष यात्रा है।

ओरियन अंतरिक्ष यान की वापसी बेहद रोमांचक और दिल दहला देने वाली थी। जब यह कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल हुआ, तो इसकी गति 40,000 किलोमीटर प्रति घंटा से भी अधिक थी। वायुमंडल के घर्षण के कारण यान के चारों ओर आग का गोला बन गया और तापमान चरम पर पहुंच गया। भीषण गर्मी और दबाव को सहते हुए ओरियन के हीट शील्ड ने अपना काम किया। कुछ ही देर में प्रशांत महासागर के ऊपर विशाल पैराशूट खुले और यान ने पानी में सुरक्षित गोता लगाया।

अमेरिकी नौसेना और नासा की रिकवरी टीमों ने तुरंत कैप्सूल को सुरक्षित घेरे में ले लिया। यान से बाहर निकलते समय चारों अंतरिक्ष यात्रियों के चेहरों पर जीत की मुस्कान थी, जो 10 दिनों की इस उच्च-जोखिम वाली यात्रा की सफलता की कहानी बयां कर रही थी।

आर्टेमिस II नासा के चंद्रमा पर फिर से पैर जमाने के महात्वाकांक्षी कार्यक्रम का दूसरा चरण है। इससे पहले आर्टेमिस I बिना किसी क्रू के गया था, लेकिन इस बार इंसानों ने चंद्रमा की कक्षा का चक्कर लगाया। मिशन का मुख्य उद्देश्य गहरे अंतरिक्ष में लाइफ-सपोर्ट सिस्टम, नेविगेशन और संचार प्रणालियों की क्षमता को जांचना था।

अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की सतह और क्षितिज से ऊपर उठती ‘अर्थराइज’ की अद्भुत तस्वीरें लीं, जो भविष्य के शोध के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस मिशन की सफलता ने आर्टेमिस III के लिए रास्ता साफ कर दिया है, जिसका लक्ष्य पांच दशकों के बाद पहली बार इंसानों को वास्तव में चंद्रमा की सतह पर उतारना है।

भारत के लिए भी यह पल खास है क्योंकि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग लगातार बढ़ रहा है। आर्टेमिस II की सफलता भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भी नए रास्ते खोल सकती है, क्योंकि भारत पहले ही आर्टेमिस समझौते का हिस्सा बन चुका है।

नासा के अधिकारियों ने इसे मानवता के लिए एक विशाल छलांग बताया है। इस मिशन ने साबित कर दिया है कि ओरियन कैप्सूल और इसके सुरक्षा उपकरण गहरे अंतरिक्ष की चुनौतियों को झेलने में सक्षम हैं। अब दुनिया की निगाहें उस दिन पर टिकी हैं जब आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत पहली महिला और पहला अश्वेत व्यक्ति चंद्रमा की धूल पर अपने पदचिह्न छोड़ेगा। यह मिशन केवल चंद्रमा तक सीमित नहीं है; यह उस ‘डीप स्पेस’ आर्किटेक्चर की नींव है जो भविष्य में इंसानों को मंगल ग्रह (Mars) तक ले जाने का माद्दा रखती है।