Jio IPO पर निवेशकों की नजर, GMP में 23% उछाल का संकेत… क्या लिस्टिंग पर होगा बंपर मुनाफा या बड़ा झटका?

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नई दिल्ली: मुकेश अंबानी की कंपनी Jio Platforms के आईपीओ को लेकर शेयर बाजार में काफी चर्चा है। ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) में तेजी और बड़े संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी ने निवेशकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। मंगलवार को उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, आईपीओ का जीएमपी 260 रुपये तक पहुंच गया था, जो 1,119 रुपये के ऊपरी इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 23.2 प्रतिशत संभावित लिस्टिंग प्रीमियम का संकेत देता है। हालांकि, निवेश से पहले यह समझना जरूरी है कि ग्रे मार्केट के संकेत वास्तविक लिस्टिंग भाव या मुनाफे की गारंटी नहीं होते।

बड़े आईपीओ में निवेशकों को क्यों लगा झटका?

शेयर बाजार में किसी कंपनी का बड़ा नाम या आईपीओ का विशाल आकार अपने आप शानदार लिस्टिंग की गारंटी नहीं देता। भारत में कई बड़े आईपीओ ऐसे रहे हैं, जिनमें निवेशकों को लिस्टिंग के दिन नुकसान उठाना पड़ा या उम्मीद से कम प्रीमियम मिला।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 10,000 करोड़ रुपये से अधिक आकार वाले 13 बड़े आईपीओ में से आठ ने अपेक्षाकृत कमजोर या सीमित प्रीमियम पर कारोबार शुरू किया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई के शेयर भी इश्यू प्राइस से करीब 0.84 प्रतिशत प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए थे।

इससे साफ है कि निवेशकों की मांग, शेयर का मूल्यांकन और लिस्टिंग के समय बाजार की स्थिति जैसे कई पहलू शुरुआती प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं।

Hyundai, LIC और Paytm के आईपीओ से समझें जोखिम

बड़े आईपीओ के पुराने उदाहरण बताते हैं कि लोकप्रिय ब्रांड होने के बावजूद लिस्टिंग पर नुकसान हो सकता है।

  • Hyundai Motor India: अक्टूबर 2024 में आए 27,858 करोड़ रुपये के आईपीओ के शेयर 1,960 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 1,934 रुपये पर सूचीबद्ध हुए थे। इस तरह निवेशकों को पहले दिन करीब 1.3 प्रतिशत का नुकसान हुआ।
  • LIC: मई 2022 में देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी का आईपीओ आया था। इसके शेयर 949 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 867.20 रुपये पर सूचीबद्ध हुए, यानी करीब 8.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ बाजार में शुरुआत हुई।
  • Paytm: One 97 Communications का 18,300 करोड़ रुपये का आईपीओ नवंबर 2021 में आया था। शेयर 2,150 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 1,950 रुपये पर सूचीबद्ध हुए थे। इससे निवेशकों को पहले दिन लगभग 9.3 प्रतिशत का नुकसान हुआ।
  • LG Electronics India: यह बड़े आईपीओ का अलग उदाहरण रहा, जिसके शेयर इश्यू प्राइस से करीब 50 प्रतिशत प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए थे।

इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि हर आईपीओ का प्रदर्शन अलग होता है। इसलिए सिर्फ कंपनी के नाम या बाजार में बने उत्साह के आधार पर निवेश का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है।

Jio Platforms के आईपीओ को लेकर इतनी चर्चा क्यों?

Jio Platforms टेलीकॉम और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी के कारण निवेशकों के आकर्षण का केंद्र है। कंपनी का बड़ा ग्राहक आधार, 5जी नेटवर्क का विस्तार और डिजिटल कारोबार में आगे बढ़ने की संभावनाएं इसके आईपीओ को लेकर उम्मीदें बढ़ाने वाले प्रमुख कारक हैं।

आईपीओ से पहले एंकर निवेशकों की भागीदारी भी चर्चा में रही। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने 212 एंकर निवेशकों को करीब 8,109.85 करोड़ रुपये के शेयर आवंटित किए। एंकर बुक में उपलब्ध शेयरों के मुकाबले संस्थागत निवेशकों की मांग 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई।

इन निवेशकों में BlackRock, Fidelity Investments, सिंगापुर का सरकारी निवेश फंड, Abu Dhabi Investment Authority, Schroders, JPMorgan Asset Management, Franklin Templeton और Invesco जैसी संस्थाओं के नाम शामिल बताए गए हैं।

हालांकि, बड़े संस्थागत निवेशकों की भागीदारी को सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, लेकिन इससे शेयर बाजार में बेहतर प्रदर्शन या आम निवेशकों के मुनाफे की गारंटी नहीं मिलती।

23% लिस्टिंग गेन का अनुमान कैसे निकला?

मंगलवार को उपलब्ध ग्रे मार्केट अनुमानों में Jio Platforms के आईपीओ का जीएमपी 260 रुपये बताया गया था। यदि ऊपरी इश्यू प्राइस 1,119 रुपये में इसे जोड़ें, तो संभावित लिस्टिंग भाव 1,379 रुपये बैठता है।

इस गणना के अनुसार, अनुमानित बढ़त करीब 23.2 प्रतिशत होती है। लेकिन यह केवल ग्रे मार्केट प्रीमियम पर आधारित गणित है, शेयर का वास्तविक लिस्टिंग भाव नहीं।

जीएमपी आधिकारिक शेयर बाजार का भाव नहीं होता। यह बदलती मांग और बाजार की धारणा के आधार पर घट-बढ़ सकता है। आईपीओ के लिए निवेशकों की दिलचस्पी कम होने या बाजार में गिरावट आने पर संभावित प्रीमियम घट सकता है। इसलिए इसे निश्चित मुनाफे के तौर पर देखना सही नहीं होगा।

क्या Jio बड़े आईपीओ का पुराना ट्रेंड बदल पाएगा?

Jio Platforms के पक्ष में बड़ा ग्राहक आधार, टेलीकॉम और डिजिटल कारोबार में मजबूत उपस्थिति तथा संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी जैसे पहलू हैं। दूसरी ओर, बड़े आईपीओ के पिछले अनुभव बताते हैं कि बाजार में शुरुआती उत्साह हमेशा लिस्टिंग के दिन मुनाफे में नहीं बदलता।

निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, कमाई की संभावनाओं, भविष्य की योजनाओं, मूल्यांकन और कारोबार से जुड़े जोखिमों को समझना जरूरी है। खासकर जो निवेशक केवल लिस्टिंग के दिन शेयर बेचकर कमाई करना चाहते हैं, उन्हें संभावित नुकसान के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

Jio Platforms का आईपीओ बड़े इश्यू के कमजोर प्रदर्शन वाले पुराने उदाहरणों से अलग साबित होगा या नहीं, इसका पता वास्तविक लिस्टिंग के बाद ही चलेगा। ऊंचा जीएमपी उम्मीद बढ़ा सकता है, लेकिन समझदारी भरा निवेश फैसला कंपनी की स्थिति और जोखिमों का आकलन करने के बाद ही लेना चाहिए।

 

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