कर्ज में फंसी कमाई का आधा हिस्सा: EMI के जाल में फंसे हजारों भारतीय
नई दिल्ली। देशभर में किए गए हालिया सर्वे ने भारत में आसान क्रेडिट की कड़वी सच्चाई उजागर की है। Eresolution Consultancy के एक्सपर्ट पैनल ने जून से दिसंबर 2025 के बीच 10,000 आर्थिक रूप से परेशान कर्जदारों पर सर्वे किया। इसके परिणाम बताते हैं कि Buy Now Pay Later (BNPL) स्कीम, त्वरित लोन ऐप्स और पर्सनल लोन हजारों लोगों को कर्ज के जाल में फंसा रहे हैं। सर्वे में पाया गया कि 85% लोग अपनी मासिक आय का 40% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ EMI चुकाने में खर्च करते हैं। ₹35,000 से ₹65,000 महीने कमाने वाले लोग EMI में ही ₹28,000 से ₹52,000 तक दे रहे हैं, जो राशन, बिजली, बच्चों की पढ़ाई और इलाज पर खर्च होना चाहिए था।
क्रेडिट से बचाव की खतरनाक चालें
सर्वे में सामने आया कि EMI में अधिकतर कमाई चली जाने के कारण लोग बचने के लिए जोखिम भरे उपाय अपनाते हैं। लगभग 40% परेशान कर्जदार एक क्रेडिट कार्ड से दूसरे कार्ड का बिल चुकाते हैं, जिससे ब्याज और बढ़ जाता है। 22% लोग दोस्तों और रिश्तेदारों से मदद लेते हैं, जबकि कुछ गैरकानूनी साहूकारों तक पहुंच जाते हैं।
जरूरी खर्चों में कटौती
65% लोगों ने अपने जरूरी खर्च कम कर दिए हैं। इसमें बच्चों की पढ़ाई रोकना, इलाज टालना, बीमा पॉलिसी बंद करना और खाने-पीने का बजट घटाना शामिल है। 16% लोगों ने सैलरी एडवांस ली है, जबकि 15% लोग अपनी संपत्ति बेच रहे हैं, जैसे सोने के गहने (8%), प्रॉपर्टी (2%) और निवेश निकालना (5%)। ये उपाय केवल 26 महीने की राहत देते हैं, लेकिन बाद में कर्ज और बढ़ जाता है और इमरजेंसी के लिए कुछ बचता नहीं।

रिकवरी एजेंट्स की धमकियां
सर्वे में यह भी सामने आया कि जब लोग समय पर EMI नहीं भर पाते हैं, तो रिकवरी एजेंट्स परेशान करने लगते हैं। 72% लोगों ने एजेंसियों की ओर से लगातार कॉल और धमकी देने की शिकायत की। 67% को महीने में 50 से 100 तक कॉल आती हैं, जिसमें गाली-गलौज भी शामिल है। कॉल जानबूझकर सुबह 6-8 बजे और रात 8-10 बजे किए जाते हैं। 39% को एक ही लेंडर से रोज कई कॉल आते हैं। 70% लोगों को व्हाट्सऐप और SMS पर धमकी भरे मैसेज मिलते हैं। 11% मामलों में एजेंट घर या ऑफिस तक पहुंच जाते हैं। 18% मामलों में माता-पिता, पति/पत्नी और बच्चों को धमकाया गया, जबकि 22% लोगों के माता-पिता या लोन फॉर्म में दिए गए रेफरेंस को कॉल किया गया। 12% ने बताया कि एजेंट्स ने उनके बॉस या ऑफिस में संपर्क कर नौकरी खतरे में डाल दी।
यह सर्वे भारत में आसान क्रेडिट और BNPL जैसी सुविधाओं के बढ़ते उपयोग के खतरनाक पहलू को उजागर करता है और दर्शाता है कि समय पर EMI न भरने पर कैसे आम लोग वित्तीय और मानसिक दबाव का शिकार बन रहे हैं।

