घातक वायरस से लड़ने के लिए गुजरात में बनेगी पहली BSL-4 लैब
गुजरात अपनी जैव-सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। राज्य में पहली बार बायोसेफ्टी लेवल-4 (BSL-4) लैब बनाई जाएगी, जो दुनिया के सबसे खतरनाक और अत्यधिक संक्रामक वायरस पर रिसर्च के लिए इस्तेमाल होगी।
यह हाई-सिक्योरिटी लैब वैक्सीन विकास, तेज जांच प्रणाली और जानलेवा वायरसों पर शोध में मदद करेगी, जिनका अभी कोई प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं है। यह कदम हाल के वर्षों में सामने आए कोरोना जैसी महामारी और पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए उठाया गया है।
कोरोना महामारी के दौरान देश को पुणे स्थित एकमात्र BSL-4 लैब पर निर्भर रहना पड़ा था। वहीं गुजरात में चांदीपुरा वायरस और लम्पी स्किन डिजीज जैसे मामलों के सामने आने से राज्य में उच्च स्तर की लैब की जरूरत और बढ़ गई थी।
यह नई BSL-4 और एनिमल BSL-4 (ABSL-4) लैब गांधीनगर के सेक्टर-28 में गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (GBRC) द्वारा विकसित की जा रही है। 14.21 एकड़ में फैली इस सुविधा में BSL-4, BSL-3, BSL-2 लैब्स के साथ अत्याधुनिक वेस्ट मैनेजमेंट और डीकंटैमिनेशन सिस्टम होंगे।

लैब में पूरी तरह सील्ड वातावरण, HEPA फिल्टर सिस्टम, वैज्ञानिकों के लिए विशेष प्रोटेक्टिव सूट, केमिकल शॉवर और वेस्ट ट्रीटमेंट सिस्टम होंगे, ताकि किसी भी स्थिति में वायरस बाहर न फैल सके।
लैब के शुरू होने के बाद गुजरात को वायरस की पहचान, जीनोम सीक्वेंसिंग और वैक्सीन रिसर्च के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे महामारी के समय तेजी से प्रतिक्रिया संभव हो सकेगी।
इस परियोजना के साथ गुजरात भारत की दूसरी BSL-4 लैब का घर बनेगा और बायोमेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करेगा।

