USTR: रूस से दूरी, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने कहा- भारत ने ऊर्जा खरीद में बदला रुख
वॉशिंगटन : अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के प्रमुख जैमीसन ग्रीर ने कहा है कि भारत (India) ने रूस से तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की खरीद धीरे-धीरे कम करनी शुरू कर दी है। इसके साथ ही भारत अब अमेरिका और अन्य देशों से ऊर्जा की खरीद बढ़ा रहा है। जैमीसन ग्रीर ने यह बात एक न्यूज चैनल को दिए एक इंटरव्यू में कही। उन्होंने बताया कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बातचीत हुई थी, जिसमें दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर सहमति जताई।
ग्रीर के मुताबिक, यूक्रेन-रूस युद्ध (2022) से पहले भारत रूस से ज्यादा तेल नहीं खरीदता था। लेकिन युद्ध के बाद रूस ने सस्ता तेल बेचना शुरू किया, जिससे भारत ने बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत उस तेल को रिफाइन करके यूरोप को बेच रहा था, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को मदद मिल रही थी।
अमेरिका का बड़ा फैसला
अमेरिका ने भारत की इस नई प्रतिबद्धता को देखते हुए भारत से आने वाले सामान पर लगने वाला 25% अतिरिक्त टैरिफ हटाने पर सहमति जताई है।

भारत ने डिजिटल सर्विस टैक्स में कटौती शुरू कर दी है और इसके साथ ही कई औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम या खत्म किए जाएंगे। वहीं अमेरिका से भारत तेल, गैस, विमान, तकनीक और कोकिंग कोल खरीदेगा और अगले 5 साल में भारत करीब 500 अरब डॉलर की अमेरिकी खरीद करने की योजना बना रहा है।
जैमीसन ग्रीर ने भारत को चीन के विकल्प के तौर पर ‘सप्लाई चेन का वे-स्टेशन’ बताया। उनके मुताबिक भारत के पास बड़ा कार्यबल और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता है, कई अमेरिकी कंपनियां चीन से बाहर निकलकर भारत की ओर देख रही हैं। हालांकि अमेरिका चाहता है कि अमेरिकी मजदूर और मैन्युफैक्चरिंग को प्राथमिकता मिले। ग्रीर ने कहा कि यह समझौता लंबे समय तक असर डालने वाला साबित होगा और भारत-अमेरिका व्यापार रिश्तों को नई दिशा देगा।

