दुनिया के सामने बेनकाब हुआ चीन: ChatGPT को ‘डायरी’ बनाकर चला रहा था खुफिया अभियान, OpenAI ने खोली पोल
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में जासूसी और दमन की रणनीतियां भी हाईटेक हो चुकी हैं। ताजा खुलासे में सामने आया है कि चीन का एक अधिकारी ChatGPT को अपनी पर्सनल डायरी की तरह इस्तेमाल कर रहा था। वही डिजिटल नोट्स अब उसके पूरे खुफिया अभियान के खुलासे की वजह बन गए।
OpenAI की नई रिपोर्ट के मुताबिक संबंधित अधिकारी विदेशी धरती पर चीनी विरोधियों को डराने-धमकाने की संगठित मुहिम चला रहा था और उसकी पूरी प्लानिंग ChatGPT चैट में दर्ज थी। संदिग्ध गतिविधि का पता चलते ही कंपनी ने संबंधित अकाउंट को पहचानकर बैन कर दिया।
अमेरिकी अधिकारी बनकर दी धमकियां, बनाए फर्जी दस्तावेज
रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि आरोपी अधिकारी ने खुद को अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारी बताकर लोगों को धमकियां दीं। इतना ही नहीं, उसने फर्जी कोर्ट दस्तावेज तैयार कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दबाव बनाने की कोशिश की कि चीनी विरोधियों के अकाउंट हटाए जाएं।
बताया गया कि वह हर कदम ChatGPT में नोट करता जा रहा था—किसे निशाना बनाना है, किस तरह दबाव बनाना है और क्या नतीजा हासिल करना है। इसी ‘रनिंग जर्नल’ ने पूरे नेटवर्क की परतें खोल दीं।
‘ट्रांसनेशनल दमन’ का संगठित मॉडल
इस अभियान का उद्देश्य अमेरिका में रह रहे चीनी विरोधियों को चुप कराना था। एक मामले में विरोधी को चेतावनी दी गई कि उसके सार्वजनिक बयान अमेरिकी कानून का उल्लंघन हैं। दूसरे मामले में कथित अमेरिकी काउंटी कोर्ट के फर्जी दस्तावेज तैयार कर सोशल मीडिया कंपनियों को भेजे गए।
बेन निम्मो, जो OpenAI में प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर हैं, ने इसे “आधुनिक चीनी ट्रांसनेशनल दमन” करार दिया। उनके मुताबिक यह सिर्फ डिजिटल ट्रोलिंग नहीं, बल्कि औद्योगिक स्तर पर चलाया जा रहा अभियान था, जिसमें सैकड़ों लोग और हजारों फर्जी ऑनलाइन अकाउंट सक्रिय थे।
ChatGPT था सिर्फ प्लानिंग टूल
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि अभियान के लिए ज्यादातर कंटेंट सीधे ChatGPT से जनरेट नहीं किया गया। प्लेटफॉर्म का उपयोग मुख्य रूप से योजना बनाने और रिकॉर्ड रखने के लिए किया गया था। वास्तविक पोस्ट और सामग्री अन्य सिस्टम्स से तैयार की जाती थी।
संदिग्ध पैटर्न सामने आने के बाद OpenAI ने अकाउंट को बंद कर दिया। जांच में पाया गया कि संबंधित यूजर कथित तौर पर चीनी कानून प्रवर्तन से जुड़ा था और विदेशी चीनी विरोधियों को टारगेट कर रहा था।
फर्जी मौत की साजिश से भी उठा पर्दा
जांच में यह भी सामने आया कि एक चीनी विरोधी की फर्जी मौत की योजना बनाई गई थी। कथित तौर पर झूठी ओबिचुअरी तैयार की गई और कब्र की तस्वीरें बनाकर ऑनलाइन वायरल की गईं। 2023 में Voice of America की चाइनीज सर्विस में भी संबंधित विरोधी की मौत की अफवाहों पर रिपोर्ट आई थी। OpenAI की जांच में यह कड़ी मेल खाती पाई गई, जिससे संकेत मिला कि अफवाहें योजनाबद्ध थीं।
यह मामला दर्शाता है कि पारंपरिक साइबर वॉरफेयर की परिभाषा बदल रही है। अब एआई टूल्स सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि रणनीतिक हथियार के रूप में भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच यह खुलासा डिजिटल सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति दोनों के लिए गंभीर संकेत देता है।



