सर्दी में पैरों की उंगलियां काली पड़ना या झनझनाहट होना खतरे का संकेत, अनदेखी पड़ सकती है भारी
नई दिल्ली। सर्दी का मौसम जहां एक ओर साग-सब्जियों और फलों की भरमार लेकर आता है, वहीं दूसरी ओर यह कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है। खासतौर पर मधुमेह से पीड़ित लोगों और धूम्रपान करने वालों में ठंड के दिनों में पैरों से जुड़ी दिक्कतें बढ़ने का खतरा रहता है। वैस्कुलर व एंडोवैस्कुलर सर्जन डॉ. के.के. पाण्डेय के अनुसार, सर्दी के मौसम में पैरों की उंगलियों का काला पड़ना, लाल धब्बे दिखना या झनझनाहट होना गंभीर चेतावनी संकेत हो सकते हैं।
डायबिटीज मरीजों में क्यों बढ़ जाता है खतरा
डॉ. पाण्डेय बताते हैं कि मधुमेह के मरीजों की टांगों और पंजों की रक्त नलियों में धीरे-धीरे चर्बी जमा हो जाती है, जिससे शुद्ध रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। सर्दी के मौसम में रक्त नलियों के सिकुड़ने से यह समस्या और गंभीर हो सकती है। समय रहते सावधानी न बरती जाए तो पैरों की उंगलियां काली पड़ने लगती हैं। ऐसे मरीजों को पैरों को साफ, सूखा और गर्म रखने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
झनझनाहट और लाल धब्बों की वजह
हुक्का, तंबाकू या धूम्रपान करने वाले लोगों में ठंड के दौरान पैरों की उंगलियों के काली पड़ने की आशंका अधिक रहती है। कई मामलों में पैरों में लाल धब्बे, तेज झनझनाहट और असहनीय दर्द की शिकायत भी सामने आती है। विशेषज्ञों के अनुसार, धूम्रपान से रक्त नलियों में सिकुड़न आ जाती है और सर्द हवाओं के कारण रक्त प्रवाह और बाधित हो जाता है। गंभीर स्थिति में यह समस्या गैंगरीन और घाव का रूप भी ले सकती है।
वैस्कुलाइटिस के मरीजों के लिए सर्दी चुनौतीपूर्ण
वैस्कुलाइटिस यानी रक्त नलियों की दीवारों में सूजन से पीड़ित मरीजों के लिए सर्दी का मौसम बेहद कष्टदायक हो सकता है। इस स्थिति में पैरों की नलियों में खून का थक्का जमने लगता है, जिससे शुद्ध रक्त का प्रवाह पूरी तरह रुक सकता है। इससे पैरों की उंगलियां गंवाने तक का खतरा पैदा हो जाता है। ऐसे मरीजों को दवाइयों के साथ-साथ ठंड से पैरों की सुरक्षा बेहद जरूरी है।

रेनाड्स रोग से पीड़ित महिलाओं को विशेष सतर्कता जरूरी
रेनाड्स रोग रक्त नलियों की अत्यधिक संवेदनशीलता से जुड़ा हुआ रोग है, जो अधिकतर महिलाओं में पाया जाता है। ठंड लगते ही पैरों की रक्त नलियां सिकुड़ जाती हैं और खून का प्रवाह अस्थायी रूप से रुक जाता है। बार-बार ऐसा होने पर उंगलियों में नीलापन और लाली बढ़ने लगती है, जो आगे चलकर घाव में भी बदल सकती है। चिकित्सकीय परामर्श, दवाइयों और संतुलित खानपान से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
इन सावधानियों से घटेगा जोखिम
सर्दी के मौसम में नंगे पैर जमीन पर चलने से बचें और ओस से भीगी घास पर टहलने से परहेज करें। पैरों को हमेशा सूती या ऊनी मोजों से ढककर रखें। बिजली के हीटर या गर्म पानी की बोतल से पैरों की सिंकाई न करें। धूप निकलने पर ही पांच से छह किलोमीटर की सैर करें। तंबाकू और धूम्रपान का सेवन पूरी तरह छोड़ दें। यदि पैरों में असहनीय दर्द, काला रंग या काली पपड़ी नजर आए तो तुरंत अनुभवी वैस्कुलर सर्जन से परामर्श लें।

