ट्रंप की ‘नोबेल’ चाहत पर बड़ा सियासी ट्विस्ट, वेनेजुएला की नेता मारिया मचाडो ने सौंपा शांति पुरस्कार का मेडल

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नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से खुद को ‘पीसमेकर’ बताते आ रहे ट्रंप की ख्वाहिश इस बार प्रतीकात्मक रूप से पूरी होती दिखी, जब वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल उन्हें भेंट कर दिया। यह वही मचाडो हैं, जिन्हें वर्ष 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला था।

ट्रंप के दावे और नोबेल की मांग

डोनाल्ड ट्रंप बीते वर्षों में सार्वजनिक रूप से यह कहते रहे हैं कि उन्होंने दुनिया में अब तक आठ बड़े संघर्ष रुकवाने में भूमिका निभाई है, जिनमें भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने का दावा भी शामिल है। इसी आधार पर वह लगातार नोबेल शांति पुरस्कार की मांग करते रहे हैं। पाकिस्तान समेत कुछ देशों ने उनके समर्थन में बयान भी दिए थे। हालांकि जब नोबेल शांति पुरस्कार उनके बजाय मारिया मचाडो को दिया गया, तो ट्रंप ने अपनी नाराजगी भी खुलकर जाहिर की थी।

व्हाइट हाउस में हुई मुलाकात

हालिया घटनाक्रम में व्हाइट हाउस में हुई एक मुलाकात के बाद मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल डोनाल्ड ट्रंप को सौंप दिया। इस दौरान ट्रंप ने मचाडो की जमकर तारीफ की और कहा कि उनके काम से प्रभावित होकर मचाडो ने यह सम्मान उन्हें दिया है। ट्रंप ने इस कदम को आपसी सम्मान का प्रतीक बताते हुए खुशी-खुशी स्वीकार किया।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जताई खुशी

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि मारिया मचाडो एक अद्भुत महिला हैं, जिन्होंने अपने जीवन में बहुत संघर्ष झेला है। उन्होंने कहा कि मचाडो द्वारा नोबेल मेडल सौंपना सम्मान और विश्वास का बेहद खूबसूरत संकेत है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, ट्रंप इस नोबेल शांति पुरस्कार के मेडल को अपने पास रखने का इरादा रखते हैं।

मचाडो का संघर्ष भरा सफर

नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद भी मारिया मचाडो लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आई थीं। वह वॉशिंगटन यात्रा से पहले भी मीडिया से दूर रहीं। इससे पहले वह नॉर्वे गई थीं, जहां उनकी बेटी ने उनकी ओर से नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त किया था। वेनेजुएला में मचाडो करीब 11 महीनों तक छिपकर रहने को मजबूर रहीं, क्योंकि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार में उन्हें लगातार दमन और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।

मादुरो की गिरफ्तारी और बदला सियासी समीकरण

साल 2026 की शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस के साथ गिरफ्तार किया गया था। उस समय मचाडो को उम्मीद थी कि ट्रंप उन्हें वेनेजुएला की सत्ता में आगे बढ़ाएंगे। लेकिन ट्रंप ने इसके बजाय डेल्सी रोड्रिगेज का समर्थन किया, जिन्हें बाद में कार्यवाहक राष्ट्रपति बना दिया गया।

नोबेल संस्थान का रुख

नोबेल संस्थान ने स्पष्ट किया है कि नियमों के अनुसार कोई भी विजेता अपना नोबेल पुरस्कार किसी अन्य को नहीं दे सकता। भले ही यह कदम केवल प्रतीकात्मक हो, लेकिन इसे असाधारण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मचाडो द्वारा ट्रंप को नोबेल मेडल सौंपना एक रणनीतिक संदेश हो सकता है, ताकि वह अमेरिकी समर्थन दोबारा हासिल कर सकें। मचाडो को लंबे समय से वेनेजुएला की लोकतांत्रिक नेता-इन-वेटिंग के तौर पर देखा जाता रहा है।