मार्शल लॉ विवाद में बड़ा फैसला: दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को 5 साल की जेल, कोर्ट ने कहा–न्याय में डाली बाधा

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नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया की राजनीति में बड़ा भूचाल लाने वाला फैसला सामने आया है। सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने देश के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को न्याय में बाधा डालने और सत्ता के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में दोषी ठहराते हुए पांच साल की सजा सुनाई है। यह फैसला दिसंबर 2024 में की गई उनकी अल्पकालिक मार्शल लॉ घोषणा से जुड़े मामलों में पहला अहम न्यायिक निर्णय माना जा रहा है।

जांचकर्ताओं को रोकने का आरोप हुआ साबित

योनहाप न्यूज एजेंसी के मुताबिक अदालत ने माना कि यून सुक योल ने जनवरी 2025 में जांचकर्ताओं को हिरासत में लेने से रोकने की कोशिश की थी। कोर्ट के अनुसार, उन्होंने कानून के दायरे में काम कर रहे अधिकारियों के रास्ते में बाधा डाली, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई। इसी आधार पर उन्हें दोषी करार दिया गया।

कैबिनेट को दरकिनार कर लागू की योजना

कोर्ट ने यह भी पाया कि पूर्व राष्ट्रपति ने अपनी मार्शल लॉ योजना को लागू करने से पहले कैबिनेट के कई सदस्यों से सलाह नहीं ली, जो उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। इतना ही नहीं, मार्शल लॉ हटाए जाने के बाद एक संशोधित घोषणा का मसौदा तैयार किया गया, जिसे बाद में यून सुक योल ने नष्ट करवा दिया।

सबूत मिटाने के आरोप भी आए सामने

मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि यून पर सुरक्षित सैन्य फोन से रिकॉर्ड हटाने का आदेश देने का आरोप था। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें कुछ बिंदुओं पर राहत भी दी। प्रेस बयानों और दो कैबिनेट सदस्यों के अधिकारों से जुड़े कुछ आरोपों में उन्हें बरी कर दिया गया।

लाइव सुनवाई में जज की सख्त टिप्पणी

जज बेक डे-ह्यून ने यून सुक योल की मौजूदगी में हुई लाइव सुनवाई के दौरान कहा कि पूर्व राष्ट्रपति ने अपने कृत्यों पर किसी तरह का पछतावा नहीं दिखाया। अदालत के मुताबिक, यह रवैया सजा तय करने में अहम कारक रहा।

अभियोजन ने मांगी थी 10 साल की सजा

विशेष अभियोजकों ने अदालत में दलील दी थी कि यून सुक योल ने अपने कार्यों को छिपाने और सही ठहराने के लिए राज्य संस्थानों का निजीकरण किया, जो बेहद गंभीर अपराध है। इसी आधार पर अभियोजन पक्ष ने उनके लिए 10 साल की सजा की मांग की थी, हालांकि कोर्ट ने फिलहाल उन्हें पांच साल की सजा सुनाई।

आने वाले फैसले पर टिकी निगाहें

यह फैसला अगले महीने आने वाले एक और बड़े मुकदमे की भूमिका तैयार करता है। उस मामले में अभियोजकों ने यून सुक योल पर अपने संक्षिप्त मार्शल लॉ प्रयास के दौरान विद्रोह का नेतृत्व करने का आरोप लगाया है। इस केस में अभियोजन पक्ष ने यहां तक कि मौत की सजा की मांग भी कर रखी है, जिससे दक्षिण कोरिया की राजनीति में अनिश्चितता और बढ़ गई है।