बैंकों को मिलेगी बड़ी राहत, 1 अप्रैल से लागू होगा RBI का नया रिस्क बेस्ड प्रीमियम सिस्टम

RBI--1770469659563_v

नई दिल्ली। बैंकिंग सेक्टर के लिए बचत और बेहतर जोखिम प्रबंधन की नई राह खुलने जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक ने ऐलान किया है कि 1 अप्रैल 2026 से बैंकों के लिए ‘रिस्क बेस्ड प्रीमियम’ फ्रेमवर्क लागू किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत अब बैंकों को एक समान दर के बजाय उनकी वित्तीय स्थिति और जोखिम प्रोफाइल के आधार पर प्रीमियम चुकाना होगा। इसका सीधा फायदा मजबूत और बेहतर प्रदर्शन करने वाले बैंकों को मिलेगा।

फ्लैट रेट सिस्टम की होगी विदाई
अब तक 1962 से लागू फ्लैट रेट प्रीमियम प्रणाली के तहत सभी बैंकों को अपनी जमा राशि पर 100 रुपये पर 12 पैसे की समान दर से प्रीमियम देना होता था। नए नियम लागू होने के बाद यह व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और प्रीमियम की दरें जोखिम के अनुसार तय होंगी। इससे बैंकिंग सिस्टम में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और वित्तीय अनुशासन को मजबूती मिलेगी।

चार श्रेणियों में बांटे जाएंगे बैंक
नई व्यवस्था के तहत बैंकों को A, B, C और D — चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। A श्रेणी में वे बैंक शामिल होंगे, जिनका जोखिम स्तर सबसे कम होगा, जबकि अन्य श्रेणियों में अपेक्षाकृत अधिक जोखिम वाले बैंक रखे जाएंगे। इसी श्रेणीकरण के आधार पर बैंकों को प्रीमियम का भुगतान करना होगा।

8 से 12 पैसे तक तय होंगी प्रीमियम दरें
रिस्क बेस्ड प्रीमियम फ्रेमवर्क के तहत प्रति 100 रुपये जमा पर प्रीमियम की दरें 8 पैसे से लेकर 12 पैसे तक होंगी। यानी कम जोखिम और मजबूत वित्तीय स्थिति वाले बैंकों को कम प्रीमियम देना पड़ेगा, जबकि अधिक जोखिम वाले बैंकों पर ज्यादा बोझ पड़ेगा।

मजबूत बैंकों को मिलेगी 33.35% तक की छूट
इस नई व्यवस्था में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले और मजबूत बैंकों को प्रीमियम भुगतान में 33.35 फीसदी तक की छूट मिलने की संभावना है। इससे न केवल बैंकों को वित्तीय राहत मिलेगी, बल्कि उन्हें अपनी बैलेंस शीट और जोखिम प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए भी प्रोत्साहन मिलेगा।

डिपॉजिट इंश्योरेंस और ग्राहकों का भरोसा
बता दें कि बैंक अपने हर जमाकर्ता के 5 लाख रुपये तक के डिपॉजिट पर इंश्योरेंस कराते हैं। रिस्क बेस्ड प्रीमियम सिस्टम लागू होने से डिपॉजिट इंश्योरेंस ढांचे को मजबूती मिलेगी और ग्राहकों का भरोसा भी बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बैंकिंग सेक्टर को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और स्थिर बनाने की दिशा में अहम साबित होगा।