बार-बार यूटीआई से परेशान महिलाएं? आयुर्वेद के उपाय देंगे जलन और दर्द से राहत
नई दिल्ली। महिलाओं में बार-बार होने वाला यूटीआई यानी मूत्र पथ संक्रमण अब केवल सामान्य संक्रमण नहीं रह गया है। चिकित्सा जगत में इसे ‘साइलेंट एपिडेमिक’ तक कहा जाने लगा है। आंकड़ों के अनुसार, हर दो में से एक महिला अपने जीवन में कम से कम एक बार यूटीआई का सामना करती है, जबकि लगभग 25 प्रतिशत महिलाओं में यह समस्या बार-बार लौटकर आती है। इसके पीछे केवल बैक्टीरिया ही जिम्मेदार नहीं होते, बल्कि महिलाओं के शरीर की बनावट और उनकी जीवनशैली भी इसमें अहम भूमिका निभाती है।
महिलाओं में यूटीआई ज्यादा क्यों होता है
विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं का मूत्रमार्ग पुरुषों की तुलना में छोटा होता है, जिससे बैक्टीरिया को पेशाब की थैली तक पहुंचने में ज्यादा दूरी तय नहीं करनी पड़ती। इसके अलावा मूत्रमार्ग का गुदा के पास होना भी संक्रमण के खतरे को बढ़ा देता है। मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने से योनि में मौजूद सुरक्षात्मक बैक्टीरिया घट जाते हैं, जिससे संक्रमण की आशंका और बढ़ जाती है। कम पानी पीना, लंबे समय तक पेशाब रोकना, सार्वजनिक शौचालयों का अधिक इस्तेमाल और माहवारी के दौरान स्वच्छता में लापरवाही भी यूटीआई को आम समस्या बना देती है।
आयुर्वेद की नजर में यूटीआई की वजह
आयुर्वेद यूटीआई को केवल बैक्टीरियल संक्रमण नहीं मानता। इसे मूत्रकृच्छ्र या मूत्राघात कहा गया है और इसका संबंध शरीर में पित्त दोष के असंतुलन से जोड़ा जाता है। अत्यधिक गर्म, तीखा, नमकीन या खट्टा भोजन, अपच और अजीर्ण की स्थिति पित्त को बढ़ा देती है। इसका असर मूत्राशय पर पड़ता है और पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना, पेट या कमर दर्द जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
आयुर्वेदिक दवाएं जो देती हैं राहत

आयुर्वेद में यूटीआई के लिए सुरक्षित और प्रभावी उपाय बताए गए हैं। चंद्रप्रभा वटी मूत्राशय की मांसपेशियों को मजबूत करने और जलन कम करने में मदद करती है। गोक्षुरादि गुग्गुल पेशाब की मात्रा बढ़ाकर बैक्टीरिया को शरीर से बाहर निकालने में सहायक माना जाता है। नीरी दवा को तुरंत राहत देने वाला बताया जाता है और यह संक्रमण को किडनी तक पहुंचने से रोकने में मदद करती है।
जड़ी-बूटियां जो शांत करती हैं जलन
इसके अलावा चन्दनासय शरीर की अंदरूनी गर्मी को शांत करता है और पेशाब में होने वाली जलन को जड़ से खत्म करने में सहायक माना जाता है। पुनर्नवा, वरुण और गिलोय जैसी जड़ी-बूटियां शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और मूत्र तंत्र को मजबूत करने में मदद करती हैं।
घरेलू उपाय और लाइफस्टाइल से भी मिलेगी राहत
आयुर्वेद में तुरंत राहत के लिए सुबह धनिया और मिश्री का पानी पीने की सलाह दी जाती है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना और बहुत तीखे या भारी भोजन से परहेज करना यूटीआई से बचाव में कारगर माना जाता है। सही दिनचर्या और आयुर्वेदिक उपाय अपनाकर महिलाएं इस बार-बार होने वाली समस्या से काफी हद तक राहत पा सकती हैं।

