स्वस्थ और रोगमुक्त जीवन के लिए अपनाएं आयुर्वेदिक दिनचर्या
मानव शरीर एक ऐसी मशीन की तरह कार्य करता है, जिसे सुचारू रूप से चलने के लिए समय-समय पर सर्विस और सही गुणवत्ता वाले ईंधन की आवश्यकता होती है। शरीर भी एक निश्चित लय यानी रिदम के अनुसार काम करता है। यदि यह लय संतुलित बनी रहे, तो बीमारियों का शरीर में प्रवेश कठिन हो जाता है और बढ़ती उम्र का असर भी देर से दिखाई देता है।
आयुर्वेदिक दिनचर्या का पालन कर शरीर को मजबूत, ऊर्जावान और रोगमुक्त रखा जा सकता है
वैज्ञानिक भाषा में इस लय को ‘सर्कैडियन रिदम’ कहा जाता है, जबकि आयुर्वेद में इसे ‘दिनचर्या’ के रूप में जाना जाता है। आयुर्वेदिक दिनचर्या का पालन कर शरीर को मजबूत, ऊर्जावान और रोगमुक्त रखा जा सकता है। आइए जानते हैं, आयुर्वेद में बताई गई इस विशेष दिनचर्या के बारे में।
दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में उठकर करनी चाहिए
आयुर्वेद के अनुसार दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में उठकर करनी चाहिए। शरीर से विषाक्त पदार्थ निकलने के बाद तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना लाभकारी होता है। बालों और त्वचा के निखार के लिए नाभि में तेल की कुछ बूंदें डालें और आंखों में अंजन करें। इसके बाद हल्का व्यायाम और सैर करें, फिर अभ्यंग यानी तेल मालिश जरूर करें। अभ्यंग से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और मांसपेशियों की थकान दूर होती है।
आहार केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि शरीर को ऊर्जा देने का प्रमुख स्रोत है

आयुर्वेद में आहार को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। आहार केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि शरीर को ऊर्जा देने का प्रमुख स्रोत है। दोपहर का भोजन 12 बजे से 1 बजे के बीच करना चाहिए, क्योंकि इस समय जठराग्नि सबसे प्रबल होती है और भोजन आसानी से पच जाता है। रात का भोजन हल्का रखें और सूर्यास्त के बाद भोजन करने से बचें।
भोजन के बाद तुरंत बिस्तर पर लेटने के बजाय कुछ कदमों की करनी चाहिए हल्की सैर
भोजन के बाद तुरंत बिस्तर पर लेटने के बजाय कुछ कदमों की हल्की सैर करनी चाहिए। यदि सैर संभव न हो, तो कुछ समय के लिए वज्रासन में बैठना लाभकारी होता है। यह आसन पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है।
स्वस्थ जीवन के लिए नींद का सही समय और गुणवत्ता भी है बेहद जरूरी
स्वस्थ जीवन के लिए नींद का सही समय और गुणवत्ता भी बेहद जरूरी है। नींद शरीर की मरम्मत का कार्य करती है। रात में गहरी नींद के लिए दूध के साथ त्रिफला या हल्दी का सेवन किया जा सकता है। इससे तनाव कम होता है और नींद बेहतर आती है। सोते समय बाईं करवट लेटना लाभकारी माना गया है, क्योंकि इससे रक्त संचार संतुलित रहता है और नींद अच्छी आती है।

