धरती की ओर गिर रहा NASA का 22 साल पुराना स्विफ्ट टेलीस्कोप, बचाने की कोशिश नाकाम; भारत समेत कई देश संभावित खतरे में
लगातार कम हो रही टेलीस्कोप की ऊंचाई
करीब डेढ़ टन वजनी स्विफ्ट टेलीस्कोप अपनी कक्षा से लगातार नीचे खिसक रहा है। अमेरिकी स्पेस फोर्स इसकी स्थिति और संभावित गिरावट की दिशा पर नजर रख रही है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, वायुमंडल में प्रवेश के दौरान इसका ज्यादातर हिस्सा जलकर नष्ट हो जाएगा। हालांकि, टंगस्टन से बने कुछ भारी हिस्से और दर्पण के टुकड़े पूरी तरह नष्ट होने से बच सकते हैं और धरती तक पहुंच सकते हैं।
भारत समेत कई देशों में गिरने की आशंका
नासा के वैज्ञानिक ब्रैड सेंको के अनुसार, टेलीस्कोप के कुछ हिस्सों के वायुमंडल में पूरी तरह नष्ट नहीं होने की आशंका है। उनके समुद्र में गिरने की संभावना अधिक बताई जा रही है, लेकिन संभावित गिरावट का क्षेत्र काफी बड़ा है।
इस दायरे में अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य व दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्से शामिल हैं। फिलहाल यह निश्चित नहीं है कि टेलीस्कोप का मलबा किस स्थान पर गिरेगा। अमेरिकी स्पेस फोर्स इसकी कक्षा और दिशा पर लगातार निगरानी कर रही है।
तीन भुजाओं वाला रोबोट भी नहीं बचा सका टेलीस्कोप
नासा ने स्विफ्ट को अंतरिक्ष में बनाए रखने के लिए करीब एक साल पहले कैटलिस्ट स्पेस कंपनी को बचाव अभियान की जिम्मेदारी सौंपी थी। कंपनी ने जुलाई में ‘लिंक’ नाम का तीन भुजाओं वाला रोबोट अंतरिक्ष में भेजा था। इसका उद्देश्य टेलीस्कोप तक पहुंचकर उसकी कक्षा को ऊंचा करना था।
हालांकि, यह अभियान सफल नहीं हो पाया। रोबोट टेलीस्कोप से करीब 12 से 15 किलोमीटर की दूरी तक ही पहुंच सका और सितंबर में खुद धरती पर लौट आया।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में सूर्य की बढ़ती गतिविधियों के कारण पृथ्वी के वायुमंडल का ऊपरी हिस्सा फैल गया। इससे अंतरिक्ष में मौजूद स्विफ्ट टेलीस्कोप पर खिंचाव बढ़ा और उसकी ऊंचाई पहले की तुलना में तेजी से घटने लगी। अक्टूबर के आखिर तक इसकी स्थिति ऐसी हो गई कि यह स्थिर रहकर वैज्ञानिक अवलोकन करने में सक्षम नहीं रहा। इसके बाद नासा ने इसके सभी तंत्र बंद कर दिए।
22 साल में 2,000 से ज्यादा गामा किरण विस्फोटों का लगाया पता
स्विफ्ट टेलीस्कोप को 20 नवंबर 2004 को अंतरिक्ष में भेजा गया था। इसका प्रमुख उद्देश्य ब्रह्मांड में होने वाले शक्तिशाली विस्फोटों, विशेष रूप से गामा किरण विस्फोटों और सुपरनोवा का अध्ययन करना था।
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि किसी असाधारण खगोलीय घटना का संकेत मिलते ही यह तेजी से अपनी दिशा बदलकर उस ओर मुड़ जाता था। अपने 22 साल के अभियान में इसने 2,000 से अधिक गामा किरण विस्फोटों और करीब 1,400 तारों के विस्फोटों का पता लगाया। इसके अलावा धूमकेतुओं, क्षुद्रग्रहों और ब्लैक होल से जुड़ी कई घटनाओं का भी अध्ययन किया।
हबल और जेम्स वेब जैसी दूरबीनों को देता था संकेत
स्विफ्ट को अंतरिक्ष में एक तरह का प्रथम प्रतिक्रिया तंत्र माना जाता था। किसी असाधारण खगोलीय घटना का संकेत मिलने पर यह हबल और जेम्स वेब जैसी दूरबीनों को सूचना देता था, ताकि वे उस घटना का अधिक विस्तार से अध्ययन कर सकें।
पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के खगोलविद जॉन नॉसेक ने कहा कि वैज्ञानिकों को पहले से पता था कि एक दिन स्विफ्ट का अभियान समाप्त होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मिशन से मिली सीख भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में ब्रह्मांड की नई खोजों को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।





