Untitled-196-e1793166888248

चार साल बाद टीम इंडिया में लौटे भुवनेश्वर कुमार का निराशाजनक प्रदर्शन, 3 मैचों में 139 रन लुटाए और मिला सिर्फ 1 विकेट

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की चार साल बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी अब तक खास प्रभाव नहीं छोड़ पाई है। न्यूजीलैंड के खिलाफ जारी पांच मैचों की टी20 सीरीज के शुरुआती तीन मुकाबलों में 36 वर्षीय गेंदबाज अपनी पुरानी लय हासिल करने के लिए जूझते नजर आए हैं। कभी अपनी स्विंग से बड़े-बड़े बल्लेबाजों को परेशान करने वाले भुवनेश्वर अब तक रन रोकने और विकेट लेने में नाकाम रहे हैं। तीन मैचों में उन्होंने 12 ओवर गेंदबाजी करते हुए 139 रन खर्च किए और केवल एक विकेट हासिल किया। ऐसे में सीरीज के बाकी मुकाबलों में उनके प्रदर्शन पर सबकी नजरें रहेंगी।

तीनों मैचों में महंगे साबित हुए भुवनेश्वर

न्यूजीलैंड के खिलाफ भारतीय टीम का प्रदर्शन अब तक शानदार रहा है। बल्लेबाजों ने आक्रामक अंदाज में रन बनाए हैं, जबकि गेंदबाजों ने भी कई मौकों पर विरोधी टीम को दबाव में रखा है। हालांकि, भुवनेश्वर कुमार के लिए शुरुआती तीन मुकाबले चुनौतीपूर्ण रहे।

पहले टी20 मैच में उन्होंने चार ओवर में 49 रन दिए। दूसरे मुकाबले में भी उनकी गेंदबाजी महंगी रही और उन्होंने 50 रन खर्च कर दिए। तीसरे मैच में भुवनेश्वर ने चार ओवर में 40 रन दिए। पिछले मुकाबलों के मुकाबले रन खर्च करने में कुछ कमी जरूर आई, लेकिन उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। तीन मैचों के बाद उनकी इकोनॉमी रेट 11.58 रन प्रति ओवर रही, जो टी20 क्रिकेट के लिहाज से काफी महंगी है।

स्विंग गेंदबाजी रही है भुवनेश्वर की सबसे बड़ी ताकत

भुवनेश्वर कुमार को नई गेंद से दोनों तरफ स्विंग कराने और शुरुआती ओवरों में विकेट निकालने की क्षमता के लिए जाना जाता है। उनकी सटीक लाइन-लेंथ और स्विंग गेंदबाजी ने लंबे समय तक उन्हें भारतीय टीम का अहम हिस्सा बनाए रखा। हालांकि, लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करना आसान नहीं होता।

मैच की परिस्थितियों को समझना, दबाव में सही लाइन-लेंथ बनाए रखना और बल्लेबाजों के मुताबिक रणनीति बदलना तेज गेंदबाज के लिए बेहद जरूरी होता है। ऐसे में भुवनेश्वर को अपनी पुरानी लय हासिल करने के लिए गेंदबाजी में अधिक सटीकता लानी होगी।

टीम प्रबंधन को भुवनेश्वर के अनुभव पर भरोसा

शुरुआती तीन मैचों में महंगे साबित होने के बावजूद टीम प्रबंधन और मुख्य कोच ने भुवनेश्वर कुमार के अनुभव पर भरोसा जताया है। माना जा रहा है कि लंबे समय बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के कारण उन्हें लय में लौटने के लिए समय की जरूरत हो सकती है।

मेरठ के गांधी बाग में क्रिकेट कोच तनकीब अहमद ने भी कहा कि लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उतरने पर खिलाड़ी पर दबाव रहता है। हर खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन करना चाहता है और भुवनेश्वर भी आगामी मैचों में अपने खेल में सुधार कर सकते हैं। वहीं, कोच अतरह अली के मुताबिक वापसी के दौरान अच्छे प्रदर्शन का दबाव स्वाभाविक है और खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करता है।

आगामी मैचों में बेहतर प्रदर्शन की होगी चुनौती

सीरीज के बचे हुए मुकाबले भुवनेश्वर कुमार के लिए अहम साबित हो सकते हैं। उन्हें न केवल रन रोकने होंगे, बल्कि विकेट लेने की अपनी क्षमता भी साबित करनी होगी। शुरुआती ओवरों में बल्लेबाजों को बांधकर रखना और उन्हें गलतियां करने के लिए मजबूर करना उनकी प्रमुख खूबियों में शामिल रहा है।

यदि भुवनेश्वर अपनी स्विंग और अनुभव का सही इस्तेमाल कर पाए, तो वह टीम इंडिया के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। फिलहाल उनके प्रदर्शन को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन सीरीज के बाकी मैचों में उनके पास वापसी का मौका है। अब देखना होगा कि अनुभवी तेज गेंदबाज अपनी गेंदबाजी में कितना सुधार कर पाते हैं और टीम प्रबंधन के भरोसे पर कितना खरा उतरते हैं।

 

----------------------------------------------------------------------------------------------