308 पहियों वाले ट्रेलर पर लदा विशाल रिएक्टर उतारने की तैयारी, 12 क्रेन और 250 से ज्यादा कर्मचारी-मजदूर संभालेंगे मोर्चा
लखीमपुर खीरी: बेल्जियम से भारत लाया गया विशालकाय रिएक्टर अब लखीमपुर खीरी की कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल पहुंचने के अंतिम चरण में है। देश के पहले औद्योगिक स्तर के पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) यानी बायोप्लास्टिक प्लांट के लिए लाई गई इस मशीन को ट्रेलर से उतारकर निर्धारित स्थान पर स्थापित करना बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इसके लिए मिल प्रबंधन ने 12 क्रेनों के साथ कर्मचारियों और मजदूरों की बड़ी टीम तैनात करने की तैयारी की है। 308 पहियों वाले विशाल हाइड्रोलिक ट्रेलर पर लदे इस रिएक्टर को देखने के लिए रास्ते भर लोगों की भीड़ जुटती रही है।
12 क्रेन की मदद से उतारा जाएगा भारी-भरकम रिएक्टर
रिएक्टर को ट्रेलर से उतारने और प्लांट परिसर में स्थापित करने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। इस काम में 12 क्रेनों का इस्तेमाल किया जाएगा। इनके संचालन और पूरी प्रक्रिया में 60 कर्मचारी तथा 150 मजदूर लगाए जाएंगे। इसके अलावा करीब 40 मजदूर ट्रेलर के साथ चल रहे हैं। इस तरह रिएक्टर के परिवहन और उसे उतारने से जुड़ी गतिविधियों में 250 से ज्यादा कर्मचारी और मजदूर शामिल हैं।
मिल प्रबंधन के मुताबिक, मशीन को सुरक्षित तरीके से उतारने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। अनुमान है कि 23 या 24 अक्टूबर को ट्रेलर चीनी मिल परिसर में प्रवेश करेगा। इसके बाद रिएक्टर को उतारने और निर्धारित स्थान पर स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
160 दिन के सफर के बाद लखीमपुर पहुंचा रिएक्टर
करीब 110 फुट लंबा और 26 फुट चौड़ा यह विशाल रिएक्टर बुधवार सुबह लखीमपुर खीरी जिले में पहुंचा। बेल्जियम से लाई गई इस मशीन ने करीब 160 दिनों का सफर तय किया और तीन राज्यों के दर्जनों जिलों से गुजरते हुए अपने गंतव्य तक पहुंची।
रिएक्टर को ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से 15 मई को रवाना किया गया था। वहां से इसे ओडिशा, झारखंड और बिहार के रास्ते चंदौली होते हुए उत्तर प्रदेश लाया गया। इसके बाद प्रदेश के विभिन्न जिलों से गुजरते हुए ट्रेलर लखीमपुर खीरी पहुंचा। मशीन को लाने के लिए रास्ते में कई जगह विशेष इंतजाम करने पड़े। बड़े आकार के कारण कुछ फुट ओवरब्रिज हटाने और नए रास्ते तैयार करने की जरूरत भी पड़ी।
ट्रेलर के पहियों की संख्या को लेकर भी हुई चर्चा
रिएक्टर के परिवहन के दौरान ट्रेलर के पहियों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आईं। शुरुआत में 308 पहियों वाले ट्रेलर की चर्चा रही। बाद में खबरें आईं कि झारखंड तक पहुंचने के दौरान ट्रेलर में 308 पहिए थे, जिन्हें बाद में करीब 50 कम कर दिया गया। बताया गया कि रास्ते के मोड़ों पर ट्रेलर को घुमाने में आ रही दिक्कतों के कारण यह बदलाव किया गया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
पहियों की संख्या को लेकर चर्चाओं के बीच ट्रेलर और उस पर लदी मशीन लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। सोशल मीडिया पर भी इसकी तस्वीरें और वीडियो साझा किए गए।
बुधवार को धौरहरा तहसील के सिसैया चौराहे से जिले में प्रवेश करने के बाद ट्रेलर को राष्ट्रीय राजमार्ग-730ए पर छाउछ में खड़ा किया गया। यहां से इसे गुरुवार सुबह कुंभी चीनी मिल पहुंचाया जाना था।
बिजली के तारों से लेकर पेड़ों की डालियों तक के लिए विशेष इंतजाम
विशाल रिएक्टर को सुरक्षित तरीके से गंतव्य तक पहुंचाने के लिए तीन सहायक ट्रक, तीन एस्कॉर्ट वाहन और करीब 40 कर्मचारियों की टीम साथ चल रही है। रास्ते में बिजली के लटकते तारों को ऊपर उठाने और पेड़ों की डालियां हटाने के लिए कर्मचारियों को जरूरी उपकरण दिए गए हैं।
ट्रेलर की लंबाई, चौड़ाई और रिएक्टर के आकार को देखते हुए परिवहन के दौरान कई तरह की व्यवस्थाएं करनी पड़ीं। सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए यातायात पुलिस, सदर कोतवाली पुलिस, लोक निर्माण विभाग और बिजली विभाग की टीमों ने आपसी समन्वय के साथ काम किया।
लैक्टिक एसिड से तैयार होगा पॉलीलैक्टिक एसिड
बलरामपुर शुगर यूनिट, कुंभी के महाप्रबंधक डॉ. सुनील कुमार यादव ने बताया कि लाई गई मशीन साइक्लाइजेशन रिएक्टर है। इसमें लैक्टिक एसिड से पॉलीलैक्टिक एसिड यानी पीएलए तैयार किया जाएगा। पीएलए का इस्तेमाल बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बनाने में होता है।
यह रिएक्टर कुंभी चीनी मिल में स्थापित किए जा रहे औद्योगिक बायोप्लास्टिक प्लांट का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मशीन के पहुंचने के बाद इसकी स्थापना से जुड़े काम को आगे बढ़ाया जाएगा।
3,080 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा औद्योगिक बायोप्लास्टिक प्लांट
लखीमपुर खीरी की कुंभी चीनी मिल में देश का पहला औद्योगिक स्तर का पॉलीलैक्टिक एसिड यानी बायोप्लास्टिक प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना पर करीब 3,080 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इसी परियोजना के लिए बेल्जियम से विशाल रिएक्टर मंगाया गया था, जो पहले ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंचा और फिर सड़क मार्ग से लखीमपुर खीरी लाया गया।
मिल अधिकारियों के अनुसार, मशीन के पहुंचने का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। अब इसे स्थापित करने की तैयारी है। अधिकारियों ने नवंबर में प्लांट चालू करने का लक्ष्य रखा है। प्लांट शुरू होने के बाद बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक के उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकेगा।





