भेड़-बकरियां चराईं, 3 बार हुए फेल, फिर चौथे प्रयास में क्रैक किया MPPSC; सरकारी स्कूल में पढ़े विष्णु गुर्जर बने अधिकारी

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मध्य प्रदेश: सफलता पाने के लिए लगातार मेहनत और असफलताओं से सीखने की जरूरत होती है। मध्य प्रदेश के छोटे से गांव सिंगापुरा के रहने वाले विष्णु गुर्जर की कहानी इसकी मिसाल है। बचपन में भेड़-बकरियां चराने और गाय-भैंसों की देखभाल करने वाले विष्णु ने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की। अधिकारी बनने का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया। एमपीपीसीएस परीक्षा के तीन प्रयासों में असफल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और चौथे प्रयास में सफलता हासिल कर अधिकारी बन गए। वर्तमान में वह मध्य प्रदेश के सहकारिता विभाग में विस्तार अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।

कौन हैं विष्णु गुर्जर?

विष्णु गुर्जर मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा पर स्थित सिंगापुरा गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता जगदीश गुर्जर और मां राममूर्ति बाई हैं। उनके माता-पिता कभी स्कूल नहीं गए और गांव में खेती तथा पशुपालन करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। ऐसे माहौल में विष्णु का बचपन भी खेतों में काम करते और पशुओं की देखभाल करते हुए बीता। हालांकि, सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और अधिकारी बनने का लक्ष्य तय किया।

सरकारी स्कूल से की पढ़ाई

विष्णु ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की। वह रोजाना साइकिल से स्कूल जाते थे। पढ़ाई में औसत छात्र होने के बावजूद उनके सपने बड़े थे। आठवीं तक की शिक्षा उन्होंने अपने गांव में हासिल की। इसके बाद पड़ोसी गांव सैंची के स्कूल से दसवीं की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2016 में उन्होंने ब्यावरा के स्कूल से 12वीं की परीक्षा पास की। इसके बाद जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्ध पीजी कॉलेज से कला संकाय में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।

ग्रेजुएशन के बाद शुरू की MPPSC की तैयारी

स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद विष्णु ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा की तैयारी शुरू की। उन्होंने पाठ्यक्रम को समझकर पढ़ाई की योजना बनाई और समय-सारिणी के अनुसार तैयारी करने लगे। उनका लक्ष्य सरकारी अधिकारी बनना था। इस सफर में उन्हें लगातार मेहनत के साथ असफलताओं का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया।

पहले प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचे, फिर भी नहीं हुआ चयन

विष्णु ने वर्ष 2020 में पहली बार परीक्षा दी। इस प्रयास में वह प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की प्रक्रिया पार करते हुए इंटरव्यू तक पहुंच गए, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। उस समय उनकी उम्र महज 21 वर्ष थी। पहली कोशिश में सफलता नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी और अपनी कमियों को दूर करने पर ध्यान दिया।

तीन बार असफल हुए, लोगों ने छोड़ा सपना छोड़ने का दबाव

पहले प्रयास के बाद विष्णु ने दोबारा परीक्षा दी, लेकिन इस बार वह मुख्य परीक्षा में सफल नहीं हो पाए। इसके बाद उन्होंने अपनी गलतियों को सुधारते हुए तीसरी बार कोशिश की। वर्ष 2022 में वह फिर इंटरव्यू तक पहुंचे, मगर इस बार भी चयन नहीं हो सका।

लगातार तीन प्रयासों में असफलता मिलने के बाद आसपास के कुछ लोग उन्हें अधिकारी बनने का सपना छोड़ने की सलाह देने लगे। ऐसे समय में उनके पिता ने उनका हौसला बढ़ाया और मेहनत जारी रखने के लिए प्रेरित किया। परिवार के इस भरोसे ने विष्णु को एक और प्रयास करने की ताकत दी।

चौथे प्रयास में मिली सफलता, बने सहकारिता विस्तार अधिकारी

तीन बार असफल होने के बाद विष्णु ने वर्ष 2023 में चौथी बार एमपीपीसीएस परीक्षा दी। इस बार उन्होंने अपनी तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ी। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उनका चयन सहकारिता विस्तार अधिकारी के पद पर हो गया। इस सफलता के साथ उन्होंने अपने अधिकारी बनने के सपने को पूरा किया।

विष्णु गुर्जर अपने क्षेत्र के पहले अधिकारी बताए जाते हैं। सरकारी स्कूल से पढ़ाई, खेती-किसानी और पशुपालन से जुड़े पारिवारिक माहौल तथा लगातार तीन असफलताओं के बाद मिली सफलता की उनकी कहानी दिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य के प्रति लगातार प्रयास जारी रखना कितना अहम है।

 

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