अल्जाइमर के इन 7 संकेतों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, समय रहते पहचानना है बेहद जरूरी

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नई दिल्ली: अल्जाइमर एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, जिसका असर धीरे-धीरे याददाश्त, सोचने-समझने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता पर पड़ सकता है। यह डिमेंशिया का सबसे आम कारण माना जाता है और खासतौर पर अधिक उम्र के लोगों में इसका खतरा बढ़ जाता है। बीमारी में दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है, जिसके कारण समय के साथ मानसिक क्षमताएं प्रभावित हो सकती हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, दिमाग में बदलाव शुरू होने के कई साल बाद इसके स्पष्ट लक्षण सामने आ सकते हैं। इसलिए बुजुर्गों में शुरुआती संकेतों को पहचानना महत्वपूर्ण है। अगर व्यवहार, याददाश्त या रोजमर्रा के काम करने के तरीके में लगातार बदलाव दिखाई दे रहे हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

बार-बार चीजें भूलना

याददाश्त कमजोर होना अल्जाइमर के प्रमुख शुरुआती संकेतों में शामिल है। कभी-कभार चीजें भूल जाना सामान्य हो सकता है, लेकिन बार-बार जरूरी चीजें रखकर भूल जाना या पहले जा चुकी जगह के बारे में याद न रहना चिंता का कारण हो सकता है।

अगर व्यक्ति रोजमर्रा की जरूरी जानकारी को बार-बार भूलने लगे और बाद में भी उसे याद करने में परेशानी हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

पैसे गिनने या हिसाब करने में परेशानी

बुनियादी गणना करने में अचानक दिक्कत होना भी चेतावनी का संकेत हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति को पैसे गिनने, हिसाब रखने या बिल का भुगतान करते समय गणना करने में परेशानी होने लगे, जबकि पहले वह यह काम आसानी से कर लेता था, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।

मूड में बदलाव और अवसाद

अल्जाइमर से प्रभावित व्यक्ति के व्यवहार और मूड में बदलाव दिखाई दे सकता है। बार-बार मूड बदलना या अवसाद जैसी समस्या शुरुआती संकेतों में शामिल हो सकती है। कुछ मामलों में मानसिक बदलाव बीमारी के स्पष्ट लक्षण सामने आने से पहले भी दिखाई दे सकते हैं।

फैसले लेने में परेशानी

अल्जाइमर का असर व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता पर भी पड़ सकता है। रोजमर्रा के सामान्य मामलों में फैसला लेने में असमंजस होना या स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में लगातार परेशानी महसूस करना चेतावनी का संकेत हो सकता है।

एकाग्रता कम होना

अल्जाइमर से प्रभावित व्यक्ति के लिए किसी काम पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो सकता है। खासतौर पर उन कामों को पूरा करने में परेशानी हो सकती है, जिन्हें वह पहले आसानी से कर लिया करता था।

काम के दौरान बार-बार ध्यान भटकना या किसी सामान्य कार्य को पूरा करने में असामान्य रूप से ज्यादा समय लगना भी ध्यान देने योग्य बदलाव हैं।

बोलने और सही शब्द खोजने में दिक्कत

अल्जाइमर का असर भाषा संबंधी क्षमता पर भी पड़ सकता है। व्यक्ति को बातचीत के दौरान सही शब्द याद करने या वाक्य को ठीक तरह से बोलने में परेशानी हो सकती है। बार-बार शब्द भूलना या अपनी बात स्पष्ट तरीके से रखने में कठिनाई होने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी हो सकता है।

बेचैनी और व्यवहार में असामान्य बदलाव

बीमारी बढ़ने पर व्यक्ति में बेचैनी और व्यवहार संबंधी बदलाव भी दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में वह अपने करीबी लोगों को पहचानने में परेशानी महसूस कर सकता है और उसका व्यवहार असामान्य हो सकता है। कुछ मरीजों में मतिभ्रम जैसी समस्या भी देखी जा सकती है।

अल्जाइमर के इन लक्षणों में से कोई एक लक्षण दिखना अपने आप में इस बीमारी की पुष्टि नहीं करता। लेकिन अगर याददाश्त, व्यवहार, भाषा या निर्णय लेने की क्षमता में लगातार बदलाव दिखाई दे रहे हैं, तो जल्द चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

 

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