UPSC के 100 साल पूरे, पीएम मोदी ने जारी किया स्मारक डाक टिकट और सिक्का; बोले- संस्था पर भरोसा आज भी अटूट

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नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने यूपीएससी की शताब्दी यात्रा के उपलक्ष्य में विशेष स्मारक डाक टिकट, सिक्का और एक विशेष पुस्तक जारी की।

समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत कैप्टन स्मित मच्छार का जिक्र करते हुए की। उन्होंने कहा कि एक दिन पहले हुई घटना में भारत के कैप्टन स्मित ने जिस धैर्य, सूझबूझ और साहस का परिचय दिया, वह देश के लिए गर्व की बात है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्मित के पिता भूपेंद्र भाई, उनकी माता गीता बहन और पत्नी सोनल से भी बातचीत की है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया उन पर गर्व कर रही है। पीएम मोदी ने देशवासियों से स्मित के उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करने और भारत का गौरव बढ़ाने वाले उनके पराक्रम का अभिनंदन करने की अपील की।

100 साल में बदली पीढ़ियां, सरकारें और तकनीक, लेकिन भरोसा कायम

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यूपीएससी की 100 साल की यात्रा में पीढ़ियां बदलीं, सरकारें बदलीं, तकनीक बदली और पाठ्यक्रम में भी बदलाव आया, लेकिन संस्था पर लोगों का भरोसा आज भी उतना ही अटूट है। उन्होंने कहा कि यह भरोसा यूपीएससी की सबसे बड़ी पूंजी है।

पीएम मोदी ने कहा कि यूपीएससी के 100 वर्ष पूरे होने का अवसर केवल एक संस्था की यात्रा का उत्सव नहीं, बल्कि उसकी विरासत का भी उत्सव है। यह उन आकांक्षाओं का उत्सव है, जिन्हें हर साल लाखों युवा अपने भीतर लेकर आगे बढ़ते हैं और उस विश्वास का भी प्रतीक है जो देश के लोगों का इस संस्था के प्रति है।

उन्होंने कहा कि यूपीएससी ने अपनी 100 वर्ष की यात्रा में देश को ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस अवसर पर जारी स्मारक सिक्का और डाक टिकट आयोग की ऐतिहासिक यात्रा के प्रतीक हैं।

1 अक्टूबर 1926 को हुई थी पहले लोक सेवा आयोग की स्थापना

भारत में पहले लोक सेवा आयोग की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी। 1924 में ली कमीशन की सिफारिशों के बाद सर रॉस बार्कर के नेतृत्व में इसकी स्थापना की गई थी। शुरुआती दौर में इसे लोक सेवा आयोग के नाम से जाना जाता था, जिसे बाद में संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी के नाम से जाना गया।

यूपीएससी की शताब्दी के मौके पर आयोजित यह कार्यक्रम दो दिवसीय है। इसमें देशभर के राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और यूपीएससी के अधिकारी भी कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं।

 

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