US के नए प्रतिबंधों पर चीन का पलटवार! 6 अमेरिकी कंपनियां ब्लैकलिस्ट, ड्रोन निर्यात पर भी लगाया शिकंजा
बैंकॉक: अमेरिका की ओर से लगाए गए नए व्यापारिक प्रतिबंधों के जवाब में चीन ने कई बड़े आर्थिक कदम उठाए हैं। चीन ने छह अमेरिकी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट में शामिल कर दिया है। इसके साथ ही अमेरिका को ड्रोन, उनके प्रमुख पुर्जों और संबंधित तकनीक के निर्यात पर कड़े नियंत्रण लागू कर दिए हैं। वहीं आयातित प्रिंटर सॉफ्टवेयर और कार्यालय उपकरणों की राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से जांच भी शुरू कर दी गई है।
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा चीनी ड्रोन के आयात पर रोक लगाने, 43 चीनी कंपनियों को उइगर जबरन श्रम रोकथाम कानून की सूची में शामिल करने और नए शुल्क लगाने के जवाब में की गई है। मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका के ये कदम दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बनी सहमति के विपरीत हैं और चीन के वैध हितों को नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए जवाबी कार्रवाई आवश्यक हो गई।
ड्रोन और तकनीक के निर्यात पर सख्त नियंत्रण
चीन ने ड्रोन, उनके प्रमुख पुर्जों और दोहरे उपयोग वाली तकनीक के निर्यात को अब मामला-दर-मामला मंजूरी के दायरे में ला दिया है। इसके तहत निर्यात के लिए प्रत्येक मामले में अलग से अनुमति लेनी होगी।
इसके अलावा चीन ने स्पष्ट किया है कि अब कोई भी चीनी संस्था या व्यक्ति ब्लैकलिस्ट की गई अमेरिकी कंपनियों के साथ व्यापार, सहयोग या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में भाग नहीं ले सकेगा।
तीन महीने बाद फिर बढ़ा दोनों देशों के बीच तनाव
मई में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद दोनों देशों के संबंधों में सुधार के संकेत मिले थे। हालांकि, तीन महीने के भीतर ही व्यापारिक प्रतिबंधों और जवाबी कार्रवाइयों के चलते दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है।
चीनी ड्रोन पर काफी हद तक निर्भर है अमेरिका
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका का ड्रोन उद्योग चीनी ड्रोन और उनके पुर्जों पर 70 से 90 प्रतिशत तक निर्भर है। अमेरिका में इस्तेमाल होने वाले लगभग 80 से 90 प्रतिशत व्यावसायिक ड्रोन चीनी कंपनियों, विशेष रूप से डीजेआई, द्वारा निर्मित हैं।
अमेरिकी पुलिस, फायर ब्रिगेड और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के 90 से 92 प्रतिशत ड्रोन भी चीन में बने हैं। इसके अलावा एयरफ्रेम, मोटर, कैमरा, स्क्रीन और रेडियो सिस्टम जैसे दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत ड्रोन पुर्जों पर भी चीन का नियंत्रण बताया जाता है।
ड्रोन उद्योग पर बढ़ सकता है लागत का दबाव
खेती, फसल निगरानी, रियल एस्टेट मैपिंग और व्यावसायिक फोटोग्राफी जैसे क्षेत्रों में भी अमेरिका बड़े पैमाने पर चीनी ड्रोन का उपयोग करता है। मौजूदा प्रतिबंधों के बाद अमेरिका को अब हांगकांग या अन्य तीसरे देशों के जरिए पुर्जों की व्यवस्था करनी पड़ सकती है। इससे ड्रोन उत्पादन और उनके पुर्जों की लागत में 25 से 35 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।





