संसद में आज सरकार का बड़ा एजेंडा, लोकसभा में पेश होंगे 3 अहम विधेयक; राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर हंगामे के आसार

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नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान केंद्र सरकार तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है। सरकार का प्रयास इन विधेयकों को आगे बढ़ाने का रहेगा, जबकि विपक्ष छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चढ़ावा विवाद समेत कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में सदन में एक बार फिर तीखी नोकझोंक और हंगामे की संभावना जताई जा रही है।

आज लोकसभा में पेश होंगे तीन महत्वपूर्ण विधेयक

सरकार जिन प्रमुख विधेयकों को सदन में प्रस्तुत करेगी, उनमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 37 किए जाने से संबंधित विधेयक शामिल है। इसके अलावा भारतीय सांख्यिकी संस्थान के लिए व्यापक वैधानिक ढांचा उपलब्ध कराने वाला विधेयक और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम में संशोधन से जुड़ा विधेयक भी लोकसभा के एजेंडे में शामिल है।

चढ़ावा विवाद को लेकर विपक्ष का सरकार पर हमला

मानसून सत्र के दौरान विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा मामले को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना रहा है। इससे पहले विपक्षी दल संसद परिसर में सांकेतिक नाट्य प्रदर्शन कर इस मुद्दे को उठा चुके हैं। कांग्रेस का आरोप है कि यह मामला केवल चढ़ावे तक सीमित नहीं है और इसे लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए। वहीं छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी विपक्ष लगातार सदन में उठा रहा है।

कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि राम मंदिर से जुड़े विवाद की शुरुआत चढ़ावे से पहले ही हो चुकी थी। उन्होंने दावा किया कि शिला पूजन के समय से ही अनियमितताएं शुरू हो गई थीं। तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कराई। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की पसंद के आधार पर हुई थी, इसलिए जवाबदेही से अलग नहीं हुआ जा सकता।

भाजपा और वीएचपी ने मांगी सार्वजनिक माफी

राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर संसद परिसर में हुए व्यंग्यात्मक प्रदर्शन पर भाजपा और विश्व हिंदू परिषद ने कड़ी आपत्ति जताई है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन से करोड़ों रामभक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव सहित प्रदर्शन में शामिल नेताओं से सार्वजनिक माफी की मांग की।

तरुण चुघ ने कहा कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि हिंदू आस्था पर सुनियोजित हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन लगातार सनातन पर निशाना साध रहे हैं। वहीं वीएचपी नेता सुरेंद्र गुप्ता ने भी इस प्रदर्शन को अशोभनीय बताते हुए इसे सनातन धर्म, संत समाज और मंदिर परंपरा का अपमान करार दिया।

पप्पू यादव ने आरोपों को किया खारिज

निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भाजपा और वीएचपी के आरोपों को अस्वीकार करते हुए कहा कि उनका विरोध प्रदर्शन किसी धर्म के खिलाफ नहीं था। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सनातन और करोड़ों लोगों की आस्था की रक्षा करना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्राथमिकी या कानूनी कार्रवाई से वह डरने वाले नहीं हैं।

 

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