हाईवे पर सफर होगा सस्ता! पुल, टनल और एलिवेटेड रोड वाले मार्गों पर अब 40% तक कम देना पड़ सकता है टोल टैक्स
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए राहत की खबर है। यदि आपके मार्ग में लंबे पुल, सुरंग, फ्लाईओवर या एलिवेटेड सड़कें शामिल हैं तो अब पहले की तुलना में कम टोल टैक्स देना पड़ सकता है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों में संशोधन किया है। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को नई व्यवस्था के अनुसार टोल दरों की समीक्षा और संशोधन की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
पहले पुल, टनल और एलिवेटेड स्ट्रक्चर के निर्माण और रखरखाव की अधिक लागत को देखते हुए उनकी लंबाई को 10 गुना मानकर टोल की गणना की जाती थी। इसी कारण कई हाईवे पर वाहन चालकों को अधिक टोल का भुगतान करना पड़ता था।
पुराने नियम में कैसे बढ़ जाता था टोल?
पुराने नियम के तहत यदि किसी हाईवे पर 5 किलोमीटर लंबी टनल या एलिवेटेड रोड होती थी तो टोल की गणना के लिए उसे 50 किलोमीटर के बराबर माना जाता था। पहाड़ी क्षेत्रों, एक्सप्रेसवे और बड़े शहरों के आसपास बने लंबे पुलों और एलिवेटेड हाईवे पर इसी वजह से टोल का बोझ काफी बढ़ जाता था। अब इसी व्यवस्था में बदलाव किया गया है।
नया टोल फॉर्मूला क्या है?
संशोधित राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 के तहत अब टोल की गणना दो अलग-अलग तरीकों से की जाएगी।
पहले तरीके में पुल, टनल, फ्लाईओवर या एलिवेटेड हिस्से की लंबाई का 10 गुना कर उसे सामान्य सड़क की लंबाई में जोड़ा जाएगा।
दूसरे तरीके में पूरे हाईवे सेक्शन की कुल लंबाई का 5 गुना किया जाएगा।
इन दोनों गणनाओं में जो दूरी कम होगी, उसी के आधार पर टोल टैक्स तय किया जाएगा। इसके अलावा 60 मीटर या उससे कम लंबाई वाले पुल और फ्लाईओवर को विशेष संरचना नहीं माना जाएगा और उन पर अलग से अतिरिक्त गणना लागू नहीं होगी।
उदाहरण से समझें नया नियम
मान लीजिए किसी हाईवे की कुल लंबाई 40 किलोमीटर है, जिसमें 30 किलोमीटर एलिवेटेड रोड या पुल है और 10 किलोमीटर सामान्य सड़क है।
पुराने नियम के अनुसार गणना 30 × 10 + 10 = 310 किलोमीटर के आधार पर होती थी।
नए नियम के अनुसार दूसरी गणना 40 × 5 = 200 किलोमीटर होगी।
चूंकि 200 किलोमीटर कम है, इसलिए अब टोल 310 किलोमीटर के बजाय 200 किलोमीटर के आधार पर लिया जाएगा।
दूसरे उदाहरण में यदि 40 किलोमीटर लंबे हाईवे में 10 किलोमीटर पुल और 30 किलोमीटर सामान्य सड़क है, तो पहली गणना 130 किलोमीटर और दूसरी 200 किलोमीटर होगी। ऐसे में 130 किलोमीटर के आधार पर टोल निर्धारित किया जाएगा।
इस बदलाव से कई मामलों में टोल की गणना लगभग 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है, जिससे वाहन चालकों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
कब से मिलेगा नए नियम का लाभ?
संशोधित नियम लागू हो चुके हैं, लेकिन अलग-अलग टोल प्लाजा पर इसका लाभ अलग समय पर मिलेगा। वर्तमान में संचालित सार्वजनिक टोल प्लाजा पर नई दरें उनके अगले वार्षिक शुल्क संशोधन से लागू होंगी। वहीं, पीपीपी मॉडल या निजी कंपनियों द्वारा संचालित टोल प्लाजा पर यह व्यवस्था रियायत अवधि समाप्त होने या परियोजना के एनएचएआई को वापस मिलने के बाद लागू होगी। भविष्य में शुरू होने वाले सभी नए टोल प्लाजा पर पहले दिन से ही इसी संशोधित फॉर्मूले के अनुसार टोल वसूला जाएगा।
वाहन चालकों और परिवहन क्षेत्र को मिलेगी राहत
सरकार के इस फैसले से निजी वाहन चालकों के साथ-साथ माल ढुलाई करने वाले व्यावसायिक वाहनों का परिचालन खर्च भी कम हो सकता है। इससे लॉजिस्टिक्स लागत घटने और भविष्य में महंगाई पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है।





