IMF की रिसर्च में ट्रंप की टैरिफ नीति पर उठे सवाल, कीमतें नहीं घटीं, अमेरिका में बढ़ा कम गुणवत्ता वाले आयात का हिस्सा

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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अर्थशास्त्रियों की एक रिसर्च में कई अहम निष्कर्ष सामने आए हैं। अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2025 में लगाए गए व्यापक आयात शुल्क के बावजूद विदेशी निर्यातकों ने अपने उत्पादों की कीमतों में अपेक्षित कटौती नहीं की। इसके बजाय अमेरिका में आयात का स्वरूप बदला और आयातकों ने अपेक्षाकृत सस्ते तथा कम गुणवत्ता वाले उत्पादों की ओर रुख किया।

आईएमएफ के वर्किंग पेपर में कहा गया है कि टैरिफ का उद्देश्य विदेशी कंपनियों को कीमतें कम करने के लिए प्रेरित करना था, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर इसका प्रभाव सीमित देखने को मिला।

विदेशी कंपनियों ने कीमतों में नहीं की उल्लेखनीय कमी

रिसर्च के मुताबिक, अमेरिकी टैरिफ लागू होने के बाद भी अधिकांश विदेशी निर्यातकों ने अपने उत्पादों की मूल कीमतों में कोई बड़ी कटौती नहीं की। नतीजतन, आयात शुल्क का बड़ा आर्थिक बोझ अमेरिकी आयातकों और घरेलू बाजार पर पड़ा, जबकि विदेशी निर्यातकों ने अतिरिक्त लागत का केवल सीमित हिस्सा ही वहन किया।

अध्ययन में कहा गया है कि प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के बावजूद अधिकांश विदेशी आपूर्तिकर्ताओं ने कीमतें घटाने के बजाय उन्हें लगभग स्थिर बनाए रखा।

महंगे उत्पादों की जगह सस्ते विकल्पों को मिली प्राथमिकता

आईएमएफ के अर्थशास्त्रियों के अनुसार, बढ़ी हुई लागत से बचने के लिए अमेरिकी आयातकों ने महंगे उत्पादों और पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं की जगह कम कीमत वाले विकल्पों का चयन करना शुरू कर दिया। इससे औसत आयात मूल्य में गिरावट तो दर्ज हुई, लेकिन इसकी वजह उत्पादों की कीमत कम होना नहीं, बल्कि आयात के स्रोत और उत्पादों में बदलाव था।

गुणवत्ता पर भी पड़ा असर

अध्ययन में यह भी कहा गया है कि कम कीमत वाले विकल्पों की ओर बढ़ते रुझान का असर आयातित वस्तुओं की गुणवत्ता पर भी पड़ा। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इससे कंपनियों की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है और उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में कम गुणवत्ता वाले उत्पाद मिलने की आशंका बढ़ सकती है।

2018-19 के अमेरिका-चीन टैरिफ विवाद जैसा दिखा रुझान

रिसर्च में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2025 में सामने आया यह पैटर्न काफी हद तक 2018-19 के अमेरिका-चीन टैरिफ विवाद के दौरान देखी गई स्थिति से मेल खाता है। उस समय भी आयात मूल्यों में बदलाव का प्रमुख कारण विदेशी कंपनियों द्वारा कीमतें कम करना नहीं, बल्कि आयात के स्रोतों में बदलाव था।

सीमा शुल्क आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है अध्ययन

आईएमएफ के अर्थशास्त्रियों ने अमेरिकी सीमा शुल्क के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए वर्ष 2025 में लागू टैरिफ वृद्धि के प्रभाव का अध्ययन किया। रिपोर्ट के अनुसार, टैरिफ नीति से विदेशी निर्यातकों से अपेक्षित मूल्य रियायतें नहीं मिल सकीं। इसके विपरीत, अमेरिकी आयात की संरचना बदल गई और औसत आयात मूल्य में आई गिरावट मुख्य रूप से सस्ते उत्पादों और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की ओर बढ़ते रुझान का परिणाम रही।

 

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