RBI MPC Meeting 2026: 3 जून से शुरू होगी अहम बैठक, क्या सस्ती होगी EMI या बढ़ेगा बोझ? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की महत्वपूर्ण बैठक 3 जून से शुरू होने जा रही है। तीन दिनों तक चलने वाली इस बैठक के बाद 5 जून को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा नीतिगत फैसलों की घोषणा करेंगे। वित्तीय बाजार और आम उपभोक्ता दोनों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट में कोई बदलाव करेगा या फिर मौजूदा स्तर को बरकरार रखेगा।

रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम

अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और महंगाई के जोखिमों को देखते हुए आरबीआई फिलहाल रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है। ऐसे में घर, वाहन और अन्य ऋणों की ब्याज दरों में तत्काल किसी बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है।

वैश्विक हालात बढ़ा रहे चिंता

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय बाजार और रुपये पर भी देखने को मिल रहा है।

हालांकि मौजूदा तिमाही में खुदरा महंगाई दर 4 से 4.1 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में महंगाई फिर से बढ़ सकती है। इसी वजह से आरबीआई फिलहाल सतर्क रुख अपनाने के पक्ष में दिखाई दे रहा है।

जीडीपी ग्रोथ को लेकर सकारात्मक संकेत

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में देश की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रह सकती है। इसके साथ पूरे वित्त वर्ष की विकास दर करीब 7.5 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है।

हालांकि वैश्विक चुनौतियों के चलते अगले वित्त वर्ष 2026-27 में विकास दर कुछ धीमी होकर 6.6 प्रतिशत रहने की संभावना व्यक्त की गई है।

ब्याज दरों के बजाय अन्य उपायों पर फोकस संभव

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरबीआई रेपो रेट में बदलाव नहीं करता है, तब भी वह वित्तीय बाजार को स्थिर बनाए रखने के लिए अन्य नीतिगत उपकरणों का इस्तेमाल कर सकता है।

इसी कड़ी में ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ जैसे उपायों पर भी विचार किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में केंद्रीय बैंक लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड खरीदता है और छोटी अवधि के बॉन्ड बेचता है, जिससे बाजार में तरलता और बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

EMI धारकों को क्या उम्मीद रखनी चाहिए?

मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अधिकांश विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार रेपो रेट में बदलाव की संभावना बेहद कम है। ऐसे में होम लोन और कार लोन की EMI फिलहाल स्थिर रह सकती है। हालांकि आरबीआई की अंतिम घोषणा 5 जून को होगी, जिसके बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

5 जून पर टिकी बाजार की नजर

एमपीसी की बैठक का निष्कर्ष केवल कर्ज लेने वालों के लिए ही नहीं, बल्कि निवेशकों, उद्योग जगत और शेयर बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगा। महंगाई, विकास दर और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आरबीआई का फैसला आने वाले महीनों की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।