यूपी के 55 लाख बिजली उपभोक्ताओं को राहत की तैयारी: स्मार्ट मीटर बकाए पर किस्तों में भुगतान का रास्ता साफ

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उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। राज्य में 55 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को जल्द बड़ी सुविधा मिल सकती है। जानकारी के मुताबिक, नियामक आयोग इन उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल किस्तों में जमा करने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है और इस संबंध में जल्द आदेश जारी हो सकता है।

प्रीपेड उपभोक्ताओं को मिल सकती है पोस्टपेड जैसी सुविधा
फिलहाल पोस्टपेड मीटर उपभोक्ताओं को बकाया राशि जमा करने में राहत दी जाती है। वे कुल बकाए का 40 प्रतिशत जमा कर शेष रकम तीन किस्तों में चुका सकते हैं। लेकिन प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के पास ऐसी कोई सुविधा नहीं है। बकाया होने पर कनेक्शन कटने के बाद उन्हें 50 प्रतिशत राशि एकमुश्त जमा करनी पड़ती है, जिससे केवल तीन दिन के लिए कनेक्शन बहाल होता है और इस अवधि में बाकी रकम भी जमा करनी होती है।

उपभोक्ताओं की परेशानी के बाद बढ़ी पहल
इस व्यवस्था से खासकर बड़े बकाए वाले उपभोक्ताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इस मुद्दे को राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की ओर से उठाया गया, जिसके बाद अब नियामक आयोग इस पर गंभीरता से विचार कर रहा है। संभावना है कि प्रीपेड उपभोक्ताओं को भी 40 प्रतिशत रकम जमा करने के बाद शेष राशि तीन किस्तों में चुकाने की सुविधा दी जाएगी।

नई बिजली दरों के साथ आएगा विस्तृत आदेश
सूत्रों के अनुसार, आगामी बिजली दरों (टैरिफ) के आदेश के साथ स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्याओं पर भी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। प्रदेश के विभिन्न बिजली वितरण क्षेत्रों में टैरिफ प्रस्तावों पर जनसुनवाई पूरी हो चुकी है, जिसमें स्मार्ट मीटर से जुड़ी कई शिकायतें सामने आई हैं।

स्मार्ट मीटर को लेकर उठीं प्रमुख समस्याएं
जनसुनवाई के दौरान उपभोक्ताओं ने कई तकनीकी और व्यवहारिक दिक्कतों की ओर ध्यान दिलाया। इनमें मीटर रीडिंग का मिलान न होना, पुराने मीटरों की तुलना में तेज रीडिंग, रिचार्ज के बाद भी कनेक्शन समय पर बहाल न होना और बैलेंस अपडेट न दिखना जैसी समस्याएं शामिल हैं। साथ ही, किस्तों में भुगतान की सुविधा न होना भी बड़ी चिंता के रूप में सामने आया।

ऐसे में माना जा रहा है कि नियामक आयोग का आगामी फैसला लाखों उपभोक्ताओं को सीधी राहत देगा और स्मार्ट मीटर व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक बनाने में मदद करेगा।