आधुनिक तकनीक के साथ 46 साल बाद रत्न भंडार की पड़ताल पहले दिन ही सामने आई बड़ी प्रगति

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नई दिल्ली : पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है जहां 46 वर्षों (46 years) के लंबे अंतराल के बाद खजाने की आधिकारिक गिनती और मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है यह दिन मंदिर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है क्योंकि इससे पहले वर्ष 1978 में इस प्रकार की विस्तृत जांच की गई थी

पहले दिन की कार्यवाही बेहद व्यवस्थित और सफल रही लगभग छह घंटे तक चली इस प्रक्रिया में चलती रत्न भंडार के करीब 80 प्रतिशत आभूषणों की गणना और सूची तैयार कर ली गई है यह वे आभूषण हैं जो भगवान के दैनिक अनुष्ठानों और विशेष अवसरों पर उपयोग में लाए जाते हैं प्रशासन के अनुसार यह केवल शुरुआत है और शेष वस्तुओं का मूल्यांकन आने वाले दिनों में जारी रहेगा

इस बार की सबसे खास बात यह है कि पूरी प्रक्रिया को अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है पारंपरिक तरीके से हटकर अब 3D मैपिंग के जरिए हर वस्तु का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि भविष्य के लिए एक सटीक और स्थायी दस्तावेज भी तैयार होगा इसके साथ ही हाई डेफिनिशन फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के जरिए हर आभूषण और कीमती वस्तु को रिकॉर्ड किया जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि या विवाद की संभावना समाप्त हो सके

मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक डॉ अरविंद कुमार पाढी ने जानकारी दी कि पहले दिन का काम बिना किसी बाधा के पूरा हुआ और टीम ने निर्धारित लक्ष्य के अनुसार तेजी से प्रगति की उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक खजाने में मौजूद सोने चांदी या रत्नों की कुल मात्रा या वजन का खुलासा नहीं किया गया है क्योंकि पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी

रत्न भंडार को दो हिस्सों में बांटा जाता है जिसमें चलती रत्न भंडार और भीतर रत्न भंडार शामिल हैं फिलहाल पहले हिस्से पर काम चल रहा है जबकि भीतर रत्न भंडार की गणना और मूल्यांकन आगामी चरणों में किया जाएगा यही वह हिस्सा है जिसे लेकर लोगों में सबसे ज्यादा उत्सुकता बनी हुई है क्योंकि माना जाता है कि इसमें अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक आभूषण सुरक्षित हैं

इस ऐतिहासिक प्रक्रिया के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया मंदिर में दर्शन व्यवस्था को पूरी तरह बंद नहीं किया गया बल्कि बाहर कथा के माध्यम से भक्तों को दर्शन की अनुमति दी गई जिससे धार्मिक गतिविधियां भी जारी रहीं और प्रशासनिक कार्य भी सुचारु रूप से चलते रहे

कुल मिलाकर यह पहल न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि प्रशासनिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है आने वाले दिनों में जैसे जैसे रत्न भंडार के बाकी हिस्सों की गिनती पूरी होगी वैसे वैसे इस प्राचीन खजाने से जुड़े कई रहस्य सामने आने की उम्मीद है