1 अप्रैल से बदल जाएगा टैक्स सिस्टम! नए आयकर कानून के 4 बड़े बदलाव जो हर कमाने वाले को जानना जरूरी
नई दिल्ली। देश की कर व्यवस्था में 1 अप्रैल 2026 से बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है, जिसे टैक्स सुधारों के इतिहास में अहम मील का पत्थर माना जा रहा है। भारत सरकार ने दशकों पुराने आयकर ढांचे को खत्म कर एक नया सरल और पारदर्शी कानून लागू करने का फैसला किया है। लंबे समय से जटिल प्रावधानों और कठिन शब्दावली के कारण आम करदाता उलझन में रहते थे, लेकिन नई प्रणाली डिजिटल दौर के अनुरूप आसान, स्पष्ट और ज्यादा जवाबदेह मानी जा रही है। इसका असर नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और निवेशकों—सभी की वित्तीय योजना पर पड़ेगा।
टैक्स ईयर सिस्टम: अब खत्म होगा कन्फ्यूजन
अब तक करदाताओं के लिए “प्रीवियस ईयर” और “असेसमेंट ईयर” का अंतर समझना मुश्किल होता था। नए कानून में यह उलझन खत्म कर एकल “टैक्स ईयर” सिस्टम लागू किया गया है। इसका मतलब है कि 1 अप्रैल से 31 मार्च के बीच हुई आय उसी वर्ष के टैक्स चक्र में गिनी जाएगी। इससे रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया सीधी हो जाएगी और आम व्यक्ति बिना विशेषज्ञ मदद के भी फॉर्म भर सकेगा।
डिजिटल सबूतों पर सख्ती, लेकिन निजता सुरक्षित
नए नियमों के तहत टैक्स चोरी के मामलों में अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्य जुटाने का अधिकार दिया गया है, पर यह अधिकार सामान्य निगरानी नहीं होगा। यह केवल उन मामलों में लागू होगा जहां गंभीर कर चोरी का ठोस संदेह हो। विभाग बिना कानूनी आधार के किसी नागरिक के WhatsApp चैट या Instagram पोस्ट की जांच नहीं कर सकेगा। इस प्रावधान का मकसद ऐसे लोगों पर कार्रवाई करना है जो सोशल मीडिया पर आलीशान जीवन दिखाते हैं लेकिन रिटर्न में कम आय घोषित करते हैं।
देरी से रिटर्न भरने वालों को बड़ी राहत
मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों के लिए नया कानून राहत लेकर आया है। पहले समयसीमा चूकने पर टीडीएस रिफंड का अधिकार खत्म हो जाता था, लेकिन अब बिलेटेड रिटर्न भरने पर भी रिफंड मिलेगा। हालांकि अनुशासन बनाए रखने के लिए लेट फीस रखी गई है—5 लाख रुपये तक की आय पर 1,000 रुपये और इससे अधिक आय पर 5,000 रुपये।

निवेशकों के लिए झटका: गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स
निवेश से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब स्टॉक मार्केट के जरिए खरीदे गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को मुनाफे पर बेचने पर 12.5% टैक्स देना होगा, जबकि पहले यह लाभ कर-मुक्त था। हालांकि जो निवेशक बॉन्ड को मैच्योरिटी तक होल्ड करेंगे, उनके लिए पहले जैसी राहत जारी रह सकती है। लेकिन ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए यह विकल्प पहले जितना आकर्षक नहीं रहेगा।
क्या है बदलाव का बड़ा संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि नया आयकर ढांचा पारदर्शिता बढ़ाने, टैक्स बेस विस्तारित करने और डिजिटल ट्रैकिंग को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे ईमानदार करदाताओं के लिए प्रक्रिया आसान होगी और टैक्स चोरी पर नियंत्रण की संभावना बढ़ेगी।

