दिव्यांगजन और आम आदमी को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण एवं त्वरित कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराती है NALSA योजना
केंद्र सरकार ने दिव्यांगजन सहित आम लोगों को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण एवं त्वरित कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कई उपाय किए हैं। कानूनी सेवा प्राधिकरण (एलएसए) अधिनियम, 1987 दिव्यांगजनों सहित समाज के कमजोर वर्गों को मुफ्त एवं सक्षम कानूनी सेवाएं प्रदान करता है।
नालसा दिव्यांगजनों के लिए एक विशेष योजना लागू कर रहा है, जिसका नाम नालसा (मानसिक रूप से बीमार और बौद्धिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को कानूनी सेवाएं) योजना, 2024 (NALSA (Legal Services to the Mentally Ill and Persons with Intellectual Disabilities) Scheme, 2024) है। इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कानूनी सेवाएं मानसिक रूप से बीमार और बौद्धिक रूप से अक्षम व्यक्तियों की विशिष्ट कानूनी एवं सामाजिक आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील हों।
यह जानकारी केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। इस योजना के अंतर्गत, लद्दाख और दादरा एवं नगर हवेली को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मानसिक रूप से बीमार और बौद्धिक रूप से अक्षम व्यक्तियों के लिए विशेष ‘कानूनी सेवा इकाई’ स्थापित की गई हैं, जिसे ‘मनोन्याय’ (एलएसयूएम) कहा जाता है।
इसके अलावा, सरकार जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों के लिए अवसंरचना विकास हेतु एक केंद्र प्रायोजित योजना को लागू कर रही है। इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के संसाधनों को बढ़ाकर न्यायालय भवन, न्यायिक अधिकारियों के आवासीय इकाइयां, वकीलों के आवास, डिजिटल कंप्यूटर कक्ष और शौचालय परिसरों का निर्माण किया जा रहा है। योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रस्तावित अवसंरचना दिव्यांगजनों के अनुकूल हो।

भवन का डिज़ाइन केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा समय-समय पर निर्धारित अनिवार्य मानकों एवं पहुंच योग्य मानकों के अनुरूप है। ई-कोर्ट्स परियोजना के तीसरे चरण में 24 घटक हैं जिनमें दिव्यांगजनों सहित आम लोगों के लिए एक मजबूत एवं सुलभ डिजिटल अवसंरचना निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण उपाय किए गए हैं।
साथ ही, दिव्यांगजनों के लिए सुलभ सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 27.54 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इसके अंतर्गत 752 न्यायालयों (उच्च न्यायालयों सहित) की वेबसाइटों को S3WaaS प्लेटफॉर्म (सेवा के रूप में सुरक्षित, स्केलेबल और सुगम्य वेबसाइट) पर स्थानांतरित किया जाएगा, जिससे वेबसाइट दिव्यांगजनों के लिए सुलभ हो जाएगा। S3WaaS प्लेटफॉर्म में आंशिक एवं पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित लोगों के लिए सामग्री को आसानी से देखने की सुविधा उपलब्ध है।

