गर्भकालीन मधुमेह से भ्रूण को हो सकता है गंभीर नुकसान, स्टडी में हुआ खुलासा
नई दिल्ली : डायबिटीज को स्वास्थ्य विशेषज्ञ सबसे गंभीर रोगों में से एक मानते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि यह रोग शरीर को धीरे-धीरे खोखला बनाती जाती है, डायबिटीज के कारण रोगियों में कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इस बीच डायबिटीज से होने वाले खतरों को लेकर अध्ययन कर रही वैज्ञानिकों की एक टीम ने बड़ा खुलासा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्भकालीन मधुमेह से भ्रूण को गंभीर नुकसान हो सकता है। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि भले ही इंसुलिन (insulin) या अन्य माध्यम से शुगर को स्तर को नियंत्रित रखा जाए तो भी यह समस्या भ्रूण को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है।
गर्भकालीन मधुमेह, डायबिटीज का एक ऐसा प्रकार है जिसका पहली बार निदान गर्भावस्था के समय में ही होता है। गर्भकालीन मधुमेह में ब्लड शुगर की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है जो गर्भवती और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन (यूएमएसओएम) के शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के माध्यम से स्थिति के बारे में सभी को विशेष सावधान रहने को कहा है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में और विस्तार से जानते हैं
साइंस एडवांस जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि गर्भकालीन मधुमेह के कारण हर साल लगभग तीन से चार लाख भ्रूण में न्यूरल ट्यूब दोष विकसित हो जाता है। इस स्थिति के कारण भ्रूण में मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी का निर्माण करने वाले ऊतकों का ठीक से विकास नहीं होने पाता है। अंत में यह स्थिति गर्भपात या शिशुओं में विकलांगता का कारण बन सकती है।
चूहों पर किए गए अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों ने इस समस्या के वास्तविक कारणों को जानने की कोशिश की। वैज्ञानिकों ने पाया कि भ्रूण में कई ऐसी कोशिकाओं (cells) का निर्माण होने लगता है जो न्यूरल ट्यूब को ठीक से बढ़ने ही नहीं देती हैं और उनके विकास को रोक देती हैं। इसके अलावा कुछ ऊतकों की उम्र भी समय से पहले ही बढ़नी शुरू हो जाती है। अध्ययन के नेतृत्वकर्ता प्रोफेसर पिनिक्सिन यांग कहते हैं, मधुमेह की समस्या किसी भी तरह की हो, यह शरीर पर गंभीर रूप से असर डाल सकती है। गर्भकालीन मधुमेह में खतरा और अधिक बढ़ जाता है।

अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कैंसर की दवा और थेरपी का उपयोग करके ऊतकों में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को रोकने में सफलता प्राप्त की। इस आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्भकालीन मधुमेह में गर्भवती (Pregnant) को कुछ विशिष्ट प्रकार की थेरपी देकर समस्या के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि किन लोगों को इस तरह की दवाओं और थेरपी की आवश्यकता होगी, इस बारे में समस्या को निदान और गर्भवती की स्थिति के आधार पर ही निर्धारित किया जा सकता है।
अध्ययन के अन्य लेखर प्रोफेसर डीन रीस कहते हैं, हमारा अगला कदम यह देखना होगा कि क्या मधुमेह से पीड़ित माताओं से पैदा हुए शिशुओं में हृदय और किडनी के जन्मजात दोष की भी समस्या हो सकती है? अगर ऐसा है तो हमें इस तरह के खतरे को रोकने के लिए अधिक विशिष्ट उपचार विकसित करने की आवश्यकता हो सकती है। जिस तरह से आज के समय में गर्भकालीन मधुमेह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं ऐसे में यह जरूरी है कि हम शिशुओं में विकलांगता को रोकने और स्वस्थ जन्म को बढ़ावा देने के अन्य तरीकों को विकसित करने के उपायों पर विचार करें। फिलहाल इस बारे में जानने कि लिए कई पहलुओं पर और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।

