UIDAI का नया आधार ऐप, पहचान सत्यापन होगा और आसान व सुरक्षित

5885

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने देश को नया आधार ऐप समर्पित किया। यह ऐप लोगों की पहचान सत्यापन प्रक्रिया को आसान, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए तैयार किया गया है, जिसमें नागरिकों की सुविधा और सहमति को सबसे अधिक महत्व दिया गया है।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा विकसित यह नया आधार ऐप एक नेक्स्ट-जेनरेशन मोबाइल एप्लिकेशन है, जो आधार नंबर धारकों को अपनी डिजिटल पहचान सुरक्षित रूप से दिखाने, साझा करने और सत्यापित करने की सुविधा देता है। ऐप का फोकस प्राइवेसी-फर्स्ट, सहमति आधारित (Consent-based) और उपयोगकर्ता के नियंत्रण पर है।

ऐप लॉन्च के बाद श्री जितिन प्रसाद ने UIDAI को बधाई देते हुए कहा कि आधार सरकार के डिजिटल गवर्नेंस मॉडल का एक प्रमुख उदाहरण है। नया आधार ऐप सेवा वितरण को और अधिक तेज, सरल और निर्बाध बनाएगा। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े देश में डिजिटल पहचान केवल तकनीक नहीं, बल्कि जन-विश्वास, सुशासन और नागरिक सशक्तिकरण का विषय है।

MeitY के सचिव श्री एस. कृष्णन ने कहा कि यह ऐप डेटा मिनिमाइजेशन को बढ़ावा देगा और आधार धारकों को अपनी जानकारी चुनिंदा रूप से साझा करने की सुविधा देगा, जिससे सुरक्षा और गोपनीयता और मजबूत होगी।

नया आधार ऐप रोजमर्रा की कई जरूरतों में उपयोगी होगा। इसमें होटल चेक-इन के लिए QR कोड आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन, सिनेमा टिकट के लिए आयु सत्यापन, अस्पतालों में आगंतुकों का सत्यापन, गिग वर्कर्स और सर्विस पार्टनर्स की पहचान जांच जैसी सुविधाएं शामिल हैं। जरूरत पड़ने पर फेस वेरिफिकेशन का विकल्प भी उपलब्ध है।

ऐप में कई उन्नत फीचर्स दिए गए हैं, जैसे एक क्लिक में बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक, ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री देखना और संपर्क विवरण साझा करने के लिए QR आधारित कॉन्टैक्ट कार्ड। एक ही मोबाइल में पांच आधार प्रोफाइल मैनेज करने की सुविधा भी दी गई है, जिससे “One Family – One App” की अवधारणा को बढ़ावा मिलता है।

UIDAI के चेयरमैन श्री नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि कागज से पेपरलेस की यात्रा एक बड़ा कदम है और UIDAI आगे भी लोगों को केंद्र में रखकर नवाचार करता रहेगा। UIDAI के सीईओ श्री भुवनेश कुमार ने बताया कि ऐप की सबसे बड़ी खासियत सेलेक्टिव क्रेडेंशियल शेयरिंग है, जिसमें उपयोगकर्ता केवल वही जानकारी साझा करेगा, जिसकी जरूरत हो। इससे आधार नंबर स्टोर नहीं होते और केवल डिजिटल रूप से साइन की गई जानकारी साझा होती है, जो डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट के अनुरूप है।

नए आधार ऐप के लॉन्च के साथ भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि उसकी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की बुनियाद नागरिक-केंद्रित, समावेशी और भरोसे पर आधारित है।

एक नज़र