रियल एस्टेट सेक्टर की रफ्तार थमी, 8 बड़े शहरों में घटी घरों की बिक्री, शेयरों में 3 महीने से लगातार गिरावट

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नई दिल्ली। देश के रियल एस्टेट सेक्टर में सुस्ती के संकेत साफ तौर पर दिखाई देने लगे हैं। एक ओर जहां रियल एस्टेट कंपनियों की बिक्री में गिरावट दर्ज की जा रही है, वहीं दूसरी ओर शेयर बाजार में भी इस सेक्टर से जुड़े स्टॉक्स दबाव में नजर आ रहे हैं। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश के आठ प्रमुख शहरों में साल 2025 के दौरान आवासीय बिक्री में 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

2025 में 12 फीसदी घटी आवासीय बिक्री

मुंबई स्थित सूचीबद्ध कंपनी आरम प्रापटेक द्वारा अधिग्रहीत प्रापटाइगर ने गुरुवार को प्राथमिक आवासीय बाजार से जुड़े आंकड़े जारी किए। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 कैलेंडर वर्ष में आठ प्रमुख शहरों में कुल आवासीय बिक्री घटकर 3,86,365 इकाई रह गई, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 4,36,992 इकाई था। यह गिरावट रियल एस्टेट बाजार में मांग के स्तर में आए बदलाव की ओर इशारा करती है।

इन शहरों में दर्ज की गई गिरावट

रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन, दिल्ली-एनसीआर, पुणे और अहमदाबाद में घरों की बिक्री में कमी देखने को मिली है। वहीं दूसरी ओर दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई के साथ कोलकाता में बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन शहरों में पिछले साल आवासीय बिक्री 15 प्रतिशत बढ़कर 1.33 लाख इकाई से अधिक रही।

दक्षिण भारत के शहरों का बेहतर प्रदर्शन

आरम प्रापटेक के कार्यकारी निदेशक ओंकार एस. ने कहा कि साल 2025 को मांग में गिरावट के बजाय बाजार के पुनर्संयोजन के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, खरीदार बाजार में सक्रिय रहे, लेकिन फैसले अधिक सोच-समझकर लिए गए। वहीं डेवलपर्स ने भी आपूर्ति को नियंत्रित और अनुशासित तरीके से प्रबंधित किया। उन्होंने बताया कि कम बिक्री के बावजूद अधिकांश शहरों में कीमतें स्थिर बनी रहीं और दक्षिण भारत के शहरों में मजबूत मांग व बेहतर सप्लाई के चलते प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा।

रियल एस्टेट शेयरों में भी दबाव

उधर, शेयर बाजार में रियल एस्टेट सेक्टर की स्थिति भी कमजोर बनी हुई है। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में 10 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। नवंबर 2025 से शुरू हुई गिरावट के चलते पिछले तीन महीनों में यह इंडेक्स करीब 20 प्रतिशत तक टूट चुका है। हाल ही में कई रियल एस्टेट कंपनियों ने अपने तिमाही नतीजे जारी किए, जो बाजार के अनुमानों से कमजोर रहे, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।

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