Budget 2026: UPI पर टैक्स का सस्पेंस! 1 फरवरी के बाद Google Pay–PhonePe से पेमेंट करना पड़ेगा महंगा?

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नई दिल्ली। देश में डिजिटल भुगतान की रीढ़ बन चुका UPI एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। बजट 2026 से ठीक पहले यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या 1 फरवरी के बाद UPI ट्रांजेक्शन पर चार्ज या टैक्स लगाया जा सकता है। फिलहाल UPI के जरिए पेमेंट करने पर आम यूजर्स से कोई शुल्क नहीं लिया जाता, लेकिन हालिया संकेतों और इंडस्ट्री की मांगों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, सरकार या वित्त मंत्रालय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

डिजिटल भुगतान का विस्फोट, लेकिन सिस्टम पर बढ़ता दबाव
डिजिटल इंडिया अभियान के तहत UPI आज चाय की दुकान से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक हर जगह इस्तेमाल हो रहा है। हालात यह हैं कि सिर्फ अक्टूबर महीने में ही UPI के जरिए 20.7 अरब से ज्यादा ट्रांजेक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 27.28 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। विशेषज्ञ मानते हैं कि इतनी तेज ग्रोथ के बावजूद मौजूदा मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ नहीं रह सकता।

0 MDR बना सबसे बड़ी चुनौती
UPI को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को शून्य कर रखा है। इसका मतलब है कि दुकानदारों को UPI पेमेंट स्वीकार करने पर कोई शुल्क नहीं देना पड़ता। लेकिन RBI से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि हर एक UPI ट्रांजेक्शन को सुरक्षित तरीके से प्रोसेस करने में बैंकों और फिनटेक कंपनियों को करीब दो रुपये का खर्च आता है। फिलहाल यह पूरा खर्च कंपनियां और बैंक खुद वहन कर रहे हैं, जिससे उनके मुनाफे पर सीधा असर पड़ रहा है।

कम होती सरकारी मदद, बढ़ती कंपनियों की चिंता
फिनटेक कंपनियों का कहना है कि सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी अब नाकाफी साबित हो रही है। आंकड़े इस चिंता को और गहरा करते हैं।
वित्त वर्ष 2024 में UPI को लेकर सरकार ने करीब 3,500 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी थी।
वित्त वर्ष 2025 में यह घटकर 2,000 करोड़ रुपये रह गई।
जबकि मौजूदा बजट अनुमान में यह रकम सिमटकर सिर्फ 427 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
वहीं, इंडस्ट्री का आकलन है कि अगले दो वर्षों में UPI नेटवर्क को सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी।

Budget 2026 से क्या चाहती है इंडस्ट्री?
पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया और प्रमुख फिनटेक कंपनियों ने सरकार के सामने दो अहम सुझाव रखे हैं। पहला, बड़े व्यापारियों पर हल्का शुल्क लगाया जाए। जिनका सालाना टर्नओवर 10 करोड़ रुपये से ज्यादा है, उनके UPI ट्रांजेक्शन पर 25 से 30 बेसिस पॉइंट का मामूली MDR लगाया जा सकता है। दूसरा, अगर सरकार UPI को पूरी तरह मुफ्त रखना चाहती है, तो बजट 2026 में इसके लिए कम से कम 8,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रावधान किया जाए।

अब सभी की निगाहें 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट पर टिकी हैं। सवाल यही है कि क्या UPI यूजर्स को राहत मिलेगी या फिर डिजिटल पेमेंट करना आने वाले दिनों में महंगा हो सकता है।