अखिलेश यादव ने बनारस के पुनर्विकास पर उठाए सवाल, यूपी सरकार पर संस्कृति और विरासत मिटाने का आरोप

1768673182_InShot_20260117_233508793

भुवनेश्वर/वाराणसी। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वाराणसी में चल रहे पुनर्विकास और विध्वंस अभियानों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि यूपी सरकार “विरासत और इतिहास को नष्ट करने” का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया में शायद ही कहीं ऐसा होता हो, जहां अपनी ही पुरानी धरोहरों को खत्म किया जा रहा हो। अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग धर्म और सनातन की बात करते हैं, उन्हें चाहिए कि वे विरासत को संजोएं, इतिहास को और बेहतर बनाएं, न कि उसे मिटाने का काम करें।

अखिलेश यादव विजन इंडिया होलिस्टिक हेल्थ समिट में हिस्सा लेने के लिए भुवनेश्वर पहुंचे थे। उसी दौरान उन्होंने वाराणसी में चल रहे विध्वंस अभियान को लेकर उठ रहे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विकास के नाम पर सदियों पुरानी पहचान और सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

विध्वंस अभियान पर बढ़ता विवाद और स्थानीय चिंता
यह बयान ऐसे समय आया है, जब वाराणसी में अतिक्रमण हटाने और पुनर्विकास के नाम पर भारी मशीनरी और बुलडोजरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस अभियान के दौरान कई पुरानी इमारतें हटाई गई हैं और खुदाई के दौरान कई प्राचीन मूर्तियां और कलाकृतियां भी सामने आई हैं। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इन ऐतिहासिक वस्तुओं को निर्माण कार्य पूरा होने के बाद दोबारा स्थापित करने के लिए संस्कृति विभाग द्वारा सुरक्षित कर लिया गया है।

हालांकि, स्थानीय लोगों और पुरोहितों ने इस पूरे अभियान को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि आधुनिक निर्माण और बड़े स्तर पर बदलाव से घाटों का प्राचीन आध्यात्मिक स्वरूप प्रभावित हो सकता है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा सहित कई विरासत स्थलों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए हैं।

मुख्यमंत्री योगी का पलटवार, विकास का किया बचाव
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर चल रहे विकास कार्यों का खुलकर बचाव किया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार से जुड़ी व्यावहारिक और मानवीय चुनौतियों का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दाह संस्कार सनातन धर्म के 16 संस्कारों में से एक है और इसे सम्मान, स्वच्छता और गरिमा के साथ संपन्न किया जाना चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से मानसून के दौरान आने वाली समस्याओं पर ध्यान दिलाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बरसात के मौसम में दाह संस्कार बेहद कठिन हो जाता है, कई बार शव अधजले रह जाते हैं, जिससे शोक संतप्त परिवारों को भारी मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ती है। इसके साथ ही पर्यावरण और स्वच्छता से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आती हैं। उनका कहना था कि सरकार का उद्देश्य परंपराओं को बनाए रखते हुए सुविधाओं का आधुनिकीकरण करना है, ताकि अनुष्ठान सम्मानपूर्वक पूरे हो सकें।

मणिकर्णिका घाट परियोजना और भविष्य की योजना
मणिकर्णिका घाट के जीर्णोद्धार और पुनर्विकास की योजना की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई 2023 को रखी थी। इस परियोजना पर लगभग 17.56 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। प्रशासन के मास्टर प्लान के तहत मणिकर्णिका घाट से सिंधिया घाट तक के क्षेत्र को सुव्यवस्थित और विस्तृत किया जाना है। इसमें तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं, दाह संस्कार में शामिल होने वाले लोगों के लिए सुगम पहुंच और बैठने की व्यवस्था, साथ ही सिंधिया घाट से संपर्क को मजबूत करने की योजना शामिल है।

नई योजना के तहत मणिकर्णिका घाट पर छत पर वीआईपी बैठने की व्यवस्था, रैंप, दर्शन क्षेत्र, बैठने की जगह और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा एक लकड़ी का प्लाजा भी बनाया जाएगा, जहां अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोग आसानी से लकड़ी खरीद सकेंगे। मुख्यमंत्री ने डोम समुदाय को भी आश्वासन दिया कि सरकार उनके साथ है और सदियों पुरानी परंपराओं को सुचारू रूप से जारी रखने में हर संभव सहयोग करेगी।

गौरतलब है कि काशी का मणिकर्णिका घाट विश्वभर में महाश्मशान के रूप में जाना जाता है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा श्मशान घाट है, जहां चौबीसों घंटे चिताएं जलती रहती हैं। इसी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण यहां होने वाले हर बदलाव पर देशभर की नजर टिकी रहती है।