सरकार ने लॉन्च किया ‘कर्मयोगी क्लासरूम’, अब AI से होगी अफसरों की स्मार्ट ट्रेनिंग

202601083631815-1536x843

केंद्र सरकार ने सिविल सेवकों की ट्रेनिंग और क्षमता विकास को और बेहतर बनाने के लिए ‘कर्मयोगी क्लासरूम’ की शुरुआत की है। यह iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर एक नया AI-आधारित फीचर है, जो अधिकारियों को ज्यादा इंटरएक्टिव, पर्सनलाइज्ड और जरूरत के हिसाब से ट्रेनिंग देगा।

केंद्रीय राज्य मंत्री (कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन) डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे लॉन्च करते हुए कहा कि iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म अधिकारियों को “नियमों से भूमिकाओं की ओर” ले जाने में मदद कर रहा है, जिससे वे अपने काम को ज्यादा स्पष्टता, जिम्मेदारी और परिणामों पर फोकस के साथ कर सकें।

उन्होंने बताया कि इस प्लेटफॉर्म पर अब AI सारथी, AI ट्यूटर और AI आधारित कैपेसिटी बिल्डिंग प्लान जैसे टूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे अधिकारियों के लिए पर्सनलाइज्ड लर्निंग, तेजी से प्लानिंग और बेहतर कार्य निष्पादन संभव हो पाया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इंसानी बुद्धिमत्ता के साथ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने इसे हाइब्रिड मॉडल बताते हुए कहा कि इससे शासन व्यवस्था को ज्यादा मजबूत, जवाबदेह और भविष्य के लिए तैयार बनाया जा सकेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक चुनौतियां, नागरिकों की अपेक्षाएं और तकनीक लगातार बदल रही हैं, इसलिए सीखना एक निरंतर प्रक्रिया होनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि मिशन कर्मयोगी की शुरुआत पहले सिविल सेवकों के लिए हुई थी, जिसे अब सभी मंत्रालयों और विभागों के अधिकारियों तक विस्तार दिया गया है। इसके साथ ही कर्मयोगी प्रारंभ पहल के तहत नए भर्ती होने वाले अधिकारियों को भी सेवा की शुरुआत से ही ट्रेनिंग दी जा रही है।

कर्मयोगी भारत की सीईओ छवि भारद्वाज ने बताया कि iGOT प्लेटफॉर्म पर अब तक 1.5 करोड़ से ज्यादा लर्नर्स जुड़ चुके हैं और 6.7 करोड़ से अधिक कोर्स पूरे किए जा चुके हैं।