देश में तेजी से बढ़ रहे ओरल और ब्रेस्ट कैंसर के मामले, महिलाओं से ज्यादा पुरुष आ रहे चपेट में

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कोलकाता: देश में कैंसर, विशेष रूप से ओरल (मुख) और ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। प्रसिद्ध हेमेटोलॉजिस्ट और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. मैमन चांडी ने कहा कि जीवनशैली में बदलाव, तंबाकू सेवन, देर से निदान और पर्यावरणीय कारक इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ये रुझान भारत के लिए गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती पेश करते हैं।

ओरल कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी
डॉ. चांडी के अनुसार, 1990 से 2021 के बीच भारत में ओरल कैंसर से मृत्यु दर 5.32 प्रति लाख से बढ़कर 5.92 प्रति लाख हो गई है। वहीं दिव्यांगता समायोजित जीवन वर्ष (DALY) दर भी 152.94 से बढ़कर 163.61 दर्ज की गई।
उन्होंने बताया कि अनुमान संकेत देते हैं कि 2022 से 2031 के बीच ओरल कैंसर के मामलों और मृत्यु दर में वृद्धि की प्रवृत्ति बनी रहेगी। आयु-मानकीकृत घटना दर (ASPR) 2031 तक 10.15 प्रति 1 लाख और मृत्यु दर 29.38 प्रति 1 लाख तक पहुंच सकती है। टाटा मेडिकल सेंटर, कोलकाता के पूर्व निदेशक चांडी ने कहा कि पुरुषों में यह दर महिलाओं के मुकाबले लगातार अधिक पाई जाती है।

ब्रेस्ट कैंसर वैश्विक स्तर पर सबसे सामान्य
उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर ब्रेस्ट कैंसर अब महिलाओं में सबसे सामान्य कैंसर बन चुका है और यह फेफड़े के कैंसर को पीछे छोड़ चुका है। भारत में भी 1990 से 2016 के बीच महिलाओं में इसकी आयु-मानकीकृत दर लगभग 40 प्रतिशत बढ़ी है। हर राज्य में ब्रेस्ट कैंसर के निदान में वृद्धि हुई है। इसके प्रमुख कारणों में जीवनशैली में बदलाव, मोटापा, शराब सेवन, देर से गर्भधारण और बेहतर निदान तकनीकें शामिल हैं।

भारत कैंसर जीनोम एटलस की पहल
डॉ. चांडी ने बताया कि भारत कैंसर उपचार के दो मॉडलों पर आगे बढ़ रहा है—निजी अस्पतालों का रेफरल सिस्टम और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की सार्वजनिक व्यवस्था। उन्होंने IIT मद्रास द्वारा शुरू किए गए ‘भारत कैंसर जीनोम एटलस (BCGA)’ का उल्लेख किया, जो देश में प्रचलित कैंसरों की आनुवंशिक विशेषताओं का मानचित्रण करने की एक महत्वपूर्ण पहल है। वर्तमान में यह परियोजना डेटा संग्रह पर केंद्रित है।

कोलोरेक्टल कैंसर में नई उम्मीद
चांडी ने बताया कि PD-1 वर्ग की इम्यूनोथेरेपी दवा डोस्टारलिमैब-जीएक्सएल (जेम्परली) ने निष्क्रिय ट्यूमर वाले कोलोरेक्टल कैंसर मरीजों के छोटे समूह में 100 प्रतिशत पूर्ण प्रतिक्रिया प्राप्त की है। हालांकि यह उपचार केवल 4–5 प्रतिशत मरीजों पर ही लागू होता है, बाकी मरीजों को अभी भी सर्जरी और कीमोथेरेपी की आवश्यकता रहती है।

इम्यूनोथेरेपी से मिल रही है राहत
यह दवा टी-कोशिकाओं के PD-1 प्रोटीन को अवरुद्ध कर कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने में मदद करती है। रूस द्वारा एमआरएनए कैंसर वैक्सीन की घोषणा पर उन्होंने कहा कि अभी इस संबंध में कोई प्रकाशित क्लिनिकल डेटा उपलब्ध नहीं है।

कैंसर के बढ़ते बोझ पर चेतावनी
चांडी के अनुसार, भारत में हर वर्ष 10 लाख से अधिक नए कैंसर मरीज सामने आते हैं। महिलाओं में ब्रेस्ट, गर्भाशय और अंडाशय के कैंसर सबसे सामान्य हैं, जबकि पुरुषों में फेफड़ों, ओरल और प्रोस्टेट कैंसर के मामले अधिक पाए जाते हैं।

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