स्वदेशी तेजस को मिली सबसे बड़ी उड़ान, वायुसेना के लिए 97 और लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी
नई दिल्ली: आत्मनिर्भर भारत और रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को अभूतपूर्व मजबूती देते हुए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCS) ने मंगलवार को भारतीय वायुसेना के लिए 62,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से 97 और स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (LCA) मार्क 1A की खरीद को हरी झंडी दे दी है। इस सौदे को देश की अब तक की सबसे बड़ी स्वदेशी रक्षा खरीद माना जा रहा है।
यह महा-परियोजना न केवल हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित उन्नत लड़ाकू विमानों से वायुसेना के बेड़े को ताकतवर बनाएगी, बल्कि देश में रक्षा उत्पादन के एक नए युग का सूत्रपात भी करेगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारतीय वायुसेना अपने 62 साल पुराने मिग-21 लड़ाकू विमानों के अंतिम बेड़े को अलविदा कहने की तैयारी कर रही है। सितंबर 2025 में चंडीगढ़ में आयोजित एक समारोह में मिग-21 विमानों को सेवानिवृत्त कर दिया जाएगा। नए 97 LCA मार्क 1A विमान इन्हीं पुराने पड़ चुके मिग विमानों की जगह लेंगे, जिससे वायुसेना की युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
हालांकि, इस बड़ी उपलब्धि के बीच LCA मार्क 1A कार्यक्रम की धीमी प्रगति वायुसेना के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। गौरतलब है कि फरवरी 2021 में वायुसेना ने 48,000 करोड़ रुपये में 83 LCA मार्क 1A विमानों का ऑर्डर दिया था, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी इनकी डिलीवरी शुरू नहीं हो पाई है। सूत्रों के अनुसार, पिछले ऑर्डर का पहला विमान अक्टूबर 2025 में मिलने की संभावना है। HAL की नासिक उत्पादन लाइन से पहला LCA मार्क 1A जल्द ही अपनी पहली उड़ान भरने वाला है।

परियोजनाओं में हो रही इस देरी पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह कई बार अपनी निराशा व्यक्त कर चुके हैं। उन्होंने समयसीमा के पालन को एक बड़ी समस्या बताते हुए कहा था कि उन्हें याद नहीं कि कोई भी परियोजना समय पर पूरी हुई हो। वायुसेना वर्तमान में स्वीकृत 42.5 स्क्वाड्रन की जगह केवल 30 स्क्वाड्रन के साथ काम कर रही है, जो उसकी क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इसके जवाब में, HAL प्रमुख डीके सुनील ने कहा है कि उनका लक्ष्य आलोचना का जवाब देने के बजाय LCA मार्क 1A को जल्द से जल्द वायुसेना को सौंपना है। HAL के अनुसार, बेंगलुरु में प्रति वर्ष 16 और नासिक में 24 विमानों का उत्पादन किया जा सकता है। अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस द्वारा इंजन आपूर्ति में हुई देरी को भी इस विलंब का एक मुख्य कारण बताया जा रहा है, जिसने अब उत्पादन तेज करने का आश्वासन दिया है।

