सोने-चांदी की कीमतों में फिर आई तेजी, फेड के फैसले पर टिकी बाजार की नजर; जानें अहम स्तर

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नई दिल्ली: लगातार गिरावट के बाद सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है। घरेलू वायदा बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक दोनों कीमती धातुओं में खरीदारी बढ़ने से भाव में सुधार आया। हालांकि, बाजार के जानकार इस तेजी को फिलहाल तकनीकी रिकवरी मान रहे हैं। अब निवेशकों की निगाहें 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और अमेरिका के महंगाई आंकड़ों पर टिकी हैं। इनसे सोने-चांदी की आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का दिसंबर वायदा करीब 0.50 प्रतिशत बढ़कर 1,42,733 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया। कारोबार के दौरान सोने ने पिछले बंद स्तर 1,42,024 रुपये से 864 रुपये की छलांग लगाते हुए 1,42,888 रुपये प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ।

दूसरी ओर, चांदी के दिसंबर वायदा में भी तेजी दर्ज की गई। इसकी कीमत 968 रुपये बढ़कर 1,96,687 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गई। कारोबार के दौरान चांदी ने पिछले बंद भाव 1,95,719 रुपये के मुकाबले करीब 0.74 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,97,186 रुपये प्रति किलोग्राम का उच्च स्तर दर्ज किया।

पिछले सप्ताह सोने में 4% और चांदी में 7% से ज्यादा की गिरावट

सोने और चांदी की कीमतों में आई मौजूदा तेजी से पहले पिछले सप्ताह बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। इस दौरान सोना करीब 4 प्रतिशत और चांदी 7 प्रतिशत से अधिक टूट गई थी। कीमतें निचले स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने खरीदारी शुरू की, जिससे दोनों धातुओं को सहारा मिला।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमतों में सुधार दर्ज किया गया। सोमवार सुबह सोना करीब 0.48 प्रतिशत चढ़कर 4,027 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। सत्र के दौरान इसने 4,032.90 डॉलर प्रति औंस का स्तर छुआ। वहीं, चांदी करीब 0.74 प्रतिशत बढ़कर 54.35 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई और कारोबार के दौरान 54.47 डॉलर प्रति औंस के उच्च स्तर तक गई।

जुलाई के बाद पहली बार 4,000 डॉलर से नीचे फिसला था सोना

पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड जुलाई के बाद पहली बार 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे चला गया था। इससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ गया। बाजार विशेषज्ञ 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर को अहम सपोर्ट मान रहे हैं। इस स्तर के आसपास खरीदारी लौटने से कीमतों में कुछ सुधार हुआ है।

हालांकि, ऊर्जा की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका अब भी बनी हुई है। ऐसे में सोने और चांदी की आगे की चाल अमेरिकी केंद्रीय बैंक के मौद्रिक नीति संबंधी रुख से प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना सीमित मानी जा रही है, लेकिन दिसंबर में दरें बढ़ाए जाने की आशंका पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता के चलते बड़े निवेशक फिलहाल सतर्कता बरत रहे हैं।

अमेरिकी महंगाई के आंकड़े तय करेंगे बाजार की दिशा

इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर (PCE) महंगाई सूचकांक के आंकड़े भी निवेशकों के लिए अहम होंगे। अगर महंगाई अनुमान से ज्यादा रहती है, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है।

आमतौर पर ऊंची ब्याज दरें सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों के लिए दबाव पैदा करती हैं। इसके उलट, महंगाई में कमी आने और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत होने पर सोने-चांदी की कीमतों को समर्थन मिल सकता है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि हालिया गिरावट के बाद चांदी ने सोने के मुकाबले बेहतर रिकवरी दिखाई है। हालांकि, तकनीकी संकेतों के अनुसार चांदी अभी पूरी तरह ओवरसोल्ड जोन से बाहर नहीं निकली है, इसलिए इसमें उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

चांदी के लिए 2 लाख रुपये का स्तर क्यों है अहम?

घरेलू वायदा बाजार में चांदी के लिए 2 लाख से 2.02 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का दायरा महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर माना जा रहा है। इस स्तर पर कीमतों को आगे बढ़ने में बाधा मिल सकती है और बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। वहीं, 1.92 लाख से 1.94 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे को मजबूत सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है।

कच्चे तेल की कीमतें भी कीमती धातुओं के बाजार को प्रभावित कर सकती हैं। ब्रेंट क्रूड हाल के दिनों में 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था। तेल की कीमतें ऊंची रहने से महंगाई बढ़ने का जोखिम रहता है। इससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने के फैसले को टाल सकते हैं।

निवेशकों की नजर डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर भी

मौजूदा तेजी के बावजूद सोने और चांदी के बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले के साथ डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर रख रहे हैं। इन संकेतकों में बदलाव से कीमती धातुओं की कीमतों में आगे तेजी या गिरावट देखने को मिल सकती है।

 

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