सुखोई की नई उड़ान, 40 फाइटर जेट होंगे और घातक! भारत के प्लान से पाक-चीन की बढ़ेगी टेंशन

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नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के सबसे अहम लड़ाकू विमानों में शामिल Su-30MKI को और मजबूत करने की तैयारी चल रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार, 7 सितंबर को रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक होनी है। इसमें करीब 40 Su-30MKI लड़ाकू विमानों के ओवरहॉल और उन्नयन से जुड़े प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है।

भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े में Su-30MKI की महत्वपूर्ण भूमिका है। पुराने और लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे विमानों को व्यापक रखरखाव के बाद फिर से पूरी तरह परिचालन स्थिति में लाने के लिहाज से यह प्रस्ताव अहम माना जा रहा है।

HAL ने तैयार किया ओवरहॉल का प्लान

इन विमानों के ओवरहॉल की योजना हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की ओर से रखी गई है। इतने बड़े स्तर पर विमानों के रखरखाव और उन्नयन में भारी खर्च आने की संभावना है। इसी वजह से प्रस्ताव को रक्षा अधिग्रहण परिषद के सामने रखा जाना महत्वपूर्ण है।

पिछले साल भी 20 Su-30MKI विमानों को ओवरहॉल के लिए चिन्हित किया गया था। अब प्रस्तावित संख्या बढ़कर 40 हो गई है। इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा विमानों को लंबे समय तक उड़ान के लिए तैयार रखना और वायुसेना की परिचालन क्षमता बनाए रखना है।

करीब 260 सुखोई पर टिकी बड़ी जिम्मेदारी

भारतीय वायुसेना के पास करीब 260 Su-30MKI विमान हैं। इन्हें वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण लड़ाकू संसाधनों में गिना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात ये लड़ाकू विमान वायु श्रेष्ठता अभियान के साथ-साथ लंबी दूरी के हमले सहित कई तरह के अभियानों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

भारत की सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए इन विमानों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि पुराने विमानों के ओवरहॉल, उन्नयन और सेवा अवधि बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।

इंजन ओवरहॉल को भी मिल चुकी है मंजूरी

Su-30MKI से जुड़े ओवरहॉल कार्यक्रम को पहले भी आगे बढ़ाया गया है। 2026 की शुरुआत में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने Su-30 के एयरो-इंजन एग्रीगेट्स के ओवरहॉल को मंजूरी दी थी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस तरह के काम से विमानों की सेवा अवधि बढ़ाने और वायुसेना की परिचालन जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है।

अब 40 विमानों के ओवरहॉल और उन्नयन का प्रस्ताव इसी व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

HAL ही संभालता है निर्माण और रखरखाव

Su-30MKI कार्यक्रम में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की भूमिका बेहद अहम है। कंपनी देश में इन विमानों का निर्माण करने के साथ उनके रखरखाव और उन्नयन से जुड़े काम भी करती है।

2024 में रक्षा मंत्रालय ने HAL के नासिक संयंत्र में बनने वाले 12 अतिरिक्त Su-30MKI विमानों के लिए करीब 13,500 करोड़ रुपये के ऑर्डर को मंजूरी दी थी। इन नए विमानों का उद्देश्य उन लड़ाकू विमानों की कमी को पूरा करना भी था, जिन्हें पिछले वर्षों में विभिन्न हादसों में खोया गया।

सिर्फ सुखोई नहीं, सेना-नौसेना के प्रस्ताव भी

रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में केवल Su-30MKI का प्रस्ताव ही चर्चा में रहने की उम्मीद नहीं है। भारतीय सेना और नौसेना भी अपनी आवश्यकताओं से जुड़े खरीद प्रस्ताव परिषद के सामने रख सकती हैं।

इससे पहले जुलाई 2026 में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने वायु रक्षा प्रणाली, ड्रोन रोधी प्रणाली, सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों और निगरानी उपकरणों से जुड़े करीब 52,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। ऐसे में सोमवार की बैठक को भी रक्षा खरीद और सैन्य क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मंजूरी मिली तो क्या बदलेगा?

अगर रक्षा अधिग्रहण परिषद से 40 Su-30MKI के ओवरहॉल और उन्नयन के प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो इसके बाद संबंधित प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा और HAL की भूमिका इसमें प्रमुख रह सकती है।

इसका सीधा फायदा यह होगा कि लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे विमानों को व्यापक रखरखाव और आवश्यक उन्नयन के बाद दोबारा बेहतर परिचालन स्थिति में लाया जा सकेगा। इससे भारतीय वायुसेना के पास उपलब्ध लड़ाकू विमानों की उपयोगी संख्या और तैयारी की स्थिति मजबूत रखने में मदद मिलेगी।

भारत के लिए Su-30MKI पहले से ही वायुसेना की रीढ़ माने जाने वाले लड़ाकू विमानों में शामिल है। ऐसे में इसके बेड़े को लगातार उन्नत करना और युद्ध के लिए तैयार रखना देश की वायु शक्ति रणनीति का अहम हिस्सा बना हुआ है।

 

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