रूसी तेल पर अमेरिका के 100% टैरिफ बिल पर भारत का जवाब, कहा- ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं; रिश्तों पर असर की चेतावनी
नई दिल्ली: रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की ताकत अमेरिकी राष्ट्रपति को देने वाले विधेयक के पारित होने के बाद भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत अपनी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और बदलते बाजार हालात के अनुसार अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा खरीदना जारी रखेगा। मंत्रालय ने यह भी कहा कि इन घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखी जा रही है और भारत अपने व्यापारिक एवं आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा।
भारत ने कहा- ऊर्जा सुरक्षा सबसे अहम
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत ने इस मुद्दे पर कई अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बातचीत की है। भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस तरह के कदमों का असर केवल दोनों देशों के आपसी संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने कारोबारी और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार इस घटनाक्रम से संभावित प्रभाव को कम करने के लिए भारतीय कारोबारी और औद्योगिक समूहों के साथ भी काम करेगी।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बिल किया पास
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ को 262-159 मतों से पारित कर दिया। विधेयक अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा। इसमें रूस के नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंधों के साथ उन जहाजों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है, जिन्हें अमेरिकी पक्ष रूस के तेल प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाला ‘शैडो फ्लीट’ बताता है।
इस कानून के तहत राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। हालांकि, विधेयक का पारित होना अपने आप भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होने के बराबर नहीं है; वास्तविक शुल्क लगाने का फैसला राष्ट्रपति के अधिकार और आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
भारत समेत कई देशों पर असर की चर्चा
विधेयक की प्रक्रिया के दौरान भारत का नाम खास तौर पर चर्चा में रहा। एक प्रस्तावित संशोधन में भारत, चीन, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक रिपब्लिक, यूएई, सिंगापुर, कजाखस्तान और किर्गिजस्तान को संभावित टैरिफ के दायरे में नामित करने का प्रस्ताव रखा गया था।
हालांकि, अंतिम कानून में किन देशों पर और किस तरह कार्रवाई होगी, यह आगे की कानूनी प्रक्रिया और राष्ट्रपति द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले अधिकारों पर निर्भर करेगा।
अमेरिकी सांसदों ने रूस के तेल कारोबार पर जताई चिंता
अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि रूस का तेल कारोबार उसकी ऊर्जा आय का अहम स्रोत है और प्रतिबंधों से बचने के लिए कथित तौर पर शैडो फ्लीट का इस्तेमाल किया जाता है। इसी वजह से विधेयक में रूस के ऊर्जा क्षेत्र और उससे जुड़े जहाजों पर अतिरिक्त प्रतिबंधों का प्रावधान किया गया है।
भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद को अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों से जोड़ता रहा है। इससे पहले भी अमेरिका की ओर से रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जा चुके हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच बढ़ा दबाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी है। नए अमेरिकी कानून से भारत के रूसी तेल आयात और दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर संभावित असर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भारत ने फिलहाल ऊर्जा सुरक्षा और अपने व्यापारिक-आर्थिक हितों की रक्षा को अपनी प्राथमिकता बताया है।





