धरती का सबसे स्वच्छ महाद्वीप भी नहीं बचा! अंटार्कटिका की मिट्टी में पहली बार मिले नैनोप्लास्टिक कण, वैज्ञानिकों की बड़ी चेतावनी

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वाशिंगटन: पृथ्वी का सबसे स्वच्छ और मानव गतिविधियों से लगभग अछूता माना जाने वाला अंटार्कटिका अब प्लास्टिक प्रदूषण की चपेट में आ गया है। वैज्ञानिकों ने पहली बार अंटार्कटिका के भीतरी हिस्सों की मिट्टी में नैनोप्लास्टिक कणों की मौजूदगी दर्ज की है। इस खोज ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।

प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, प्लास्टिक प्रदूषण अब केवल महासागरों, नदियों और शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पृथ्वी के सबसे दूरस्थ और संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र तक भी पहुंच चुका है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी है।

क्या हैं नैनोप्लास्टिक और क्यों हैं ज्यादा खतरनाक?

नैनोप्लास्टिक प्लास्टिक के अत्यंत सूक्ष्म कण होते हैं, जिनका आकार एक माइक्रोमीटर से भी कम होता है। बेहद छोटे आकार के कारण ये हवा, पानी और मिट्टी के माध्यम से लंबी दूरी तक आसानी से पहुंच सकते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, माइक्रोप्लास्टिक की तुलना में नैनोप्लास्टिक अधिक खतरनाक होते हैं क्योंकि ये जीवों और पौधों की कोशिकाओं के भीतर तक प्रवेश करने की क्षमता रखते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ये सूक्ष्म कण अन्य जहरीले रासायनिक प्रदूषकों को भी अपने साथ लेकर पर्यावरण और जैविक तंत्र पर व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं। इससे पहले अंटार्कटिका के समुद्री जल, बर्फ, तटीय क्षेत्रों और समुद्री जीवों में प्लास्टिक कणों की मौजूदगी सामने आ चुकी थी, लेकिन मिट्टी में नैनोप्लास्टिक मिलने का यह पहला वैज्ञानिक प्रमाण है।

स्थानीय गतिविधियों के साथ हवा भी बनी वजह

वैज्ञानिकों के मुताबिक, अंटार्कटिका तक नैनोप्लास्टिक पहुंचने के पीछे केवल स्थानीय गतिविधियां ही जिम्मेदार नहीं हैं। मैकमर्डो स्टेशन और स्कॉट बेस जैसे शोध केंद्रों में वैज्ञानिक कार्यों, उपकरणों और प्लास्टिक सामग्री के उपयोग से स्थानीय स्तर पर भी प्रदूषण फैल सकता है।

इसके अलावा, वायुमंडलीय धाराएं हजारों किलोमीटर दूर स्थित क्षेत्रों से भी इन सूक्ष्म प्लास्टिक कणों को अंटार्कटिका तक पहुंचा सकती हैं। शोधकर्ताओं के मॉडल से संकेत मिले हैं कि विशेष रूप से सर्दियों के मौसम में लंबी दूरी तक वायुमंडलीय परिवहन नैनोप्लास्टिक के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मिट्टी में मिले कई तरह के प्लास्टिक कण

अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने मिट्टी में पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीइथिलीन, पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट, पॉलीस्टाइरीन और पॉलीविनाइल क्लोराइड जैसे विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक कणों की पहचान की। इनमें पॉलीप्रोपाइलीन सबसे अधिक मात्रा में पाया गया। इसके अलावा वाहनों के टायर घिसने से निकलने वाले सूक्ष्म प्लास्टिक कण भी उल्लेखनीय मात्रा में मिले हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि अलग-अलग प्रकार के प्लास्टिक की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि अंटार्कटिका तक प्रदूषण कई स्रोतों के माध्यम से पहुंच रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक प्रदूषण की गंभीरता और अधिक स्पष्ट होती है।

 

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