अमेरिका में महंगाई का बड़ा झटका! पेट्रोल 9.1% महंगा, शेयर बाजार में भी मची भारी बिकवाली

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नई दिल्ली: अमेरिका में महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ गया है। सितंबर 2026 में देश की महंगाई दर अगस्त के 3.4 प्रतिशत से बढ़कर 3.7 प्रतिशत पर पहुंच गई। बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, एक महीने के दौरान पेट्रोल की कीमतों में 9.1 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को ऊपर धकेलने में अहम भूमिका निभाई। उम्मीद से ज्यादा महंगाई के आंकड़ों ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी, जिसका असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिला।

अमेरिकी शेयर बाजार में भारी बिकवाली, नैस्डैक करीब 2% टूटा

महंगाई के बढ़ते दबाव, ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका और कंपनियों के कमजोर वित्तीय नतीजों ने अमेरिकी शेयर बाजार को दबाव में ला दिया। नैस्डैक में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एसएंडपी 500 लगभग 1 प्रतिशत नीचे आ गया।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में कमजोरी के साथ कर्ज से जुड़ी चिंताओं ने भी निवेशकों के रुख को प्रभावित किया। इस गिरावट के साथ एसएंडपी 500 का लगातार 53 कारोबारी सत्रों तक किसी एक दिन में 1 प्रतिशत की गिरावट से बचने का सिलसिला भी समाप्त हो गया।

अनुमान से ज्यादा बढ़ी अमेरिका की महंगाई

अमेरिका के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई में सितंबर के दौरान मासिक आधार पर 0.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। बाजार को सालाना महंगाई दर 3.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद थी, लेकिन वास्तविक आंकड़ा 3.7 प्रतिशत रहा।

खाद्य और ऊर्जा की कीमतों को हटाकर मापी जाने वाली कोर महंगाई दर सालाना आधार पर 2.6 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि बाजार का अनुमान 2.5 प्रतिशत था। वहीं, सितंबर में मासिक कोर सीपीआई में 0.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि इसके 0.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई थी।

इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि महंगाई का दबाव केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। दूसरी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई है।

पेट्रोल के दाम एक महीने में 9.1% बढ़े

सितंबर में अमेरिका के ऊर्जा सूचकांक में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान पेट्रोल की कीमतें 9.1 प्रतिशत बढ़ीं। रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल की कीमतों में उछाल ने महीने के दौरान उपभोक्ता महंगाई सूचकांक में हुई कुल बढ़ोतरी में लगभग आधा योगदान दिया।

पिछले एक साल में पेट्रोल की कीमतों में 34.2 प्रतिशत और हीटिंग ऑयल की कीमतों में 74.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ऊर्जा की कीमतों में इस तेजी से आम उपभोक्ताओं के खर्च पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

खाद्य पदार्थों से लेकर कपड़ों तक के दामों में बदलाव

सितंबर में अमेरिका में खाद्य पदार्थों की कीमतें मासिक आधार पर स्थिर रहीं, लेकिन सालाना आधार पर इनमें 2.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। आवास, पुरानी कारों और ट्रकों की कीमतों में भी वृद्धि देखने को मिली।

कपड़ों के दाम सितंबर में मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत और सालाना आधार पर 3.4 प्रतिशत बढ़े। रिपोर्ट के अनुसार, आयात शुल्क यानी टैरिफ भी कपड़ों की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। इससे स्पष्ट है कि ऊर्जा के अलावा अन्य खर्चों में भी बढ़ोतरी का दबाव बना हुआ है।

फेडरल रिजर्व के अगले फैसले पर टिकी बाजार की नजर

अमेरिका में महंगाई के आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण ऊर्जा बाजार पर दबाव बना हुआ है। ऊर्जा महंगी होने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

महंगाई के अनुमान से अधिक रहने के बाद कारोबारियों ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति बैठक को लेकर अपने अनुमान बदलने शुरू कर दिए। सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल में अक्टूबर की बैठक के दौरान ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 54 प्रतिशत आंकी गई थी।

यदि महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। वहीं, ब्याज दरें बढ़ने से कर्ज महंगा होने और कंपनियों की वित्तीय लागत बढ़ने की आशंका रहती है। इसी अनिश्चितता के बीच निवेशक आगामी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंक के अगले फैसले पर नजर बनाए हुए हैं।

भारत में भी सितंबर के दौरान बढ़ी महंगाई

महंगाई का दबाव भारत में भी बढ़ने की खबर है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में देश की थोक महंगाई दर बढ़कर 11.39 प्रतिशत हो गई, जबकि अगस्त में यह 9.9 प्रतिशत थी। इसी तरह खुदरा महंगाई दर अगस्त के 4.83 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई।

अमेरिका और भारत में महंगाई के आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं, जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। आने वाले दिनों में तेल की कीमतों, महंगाई के नए आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर संबंधी फैसलों का असर शेयर बाजारों तथा आर्थिक गतिविधियों पर महत्वपूर्ण रह सकता है।

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