अब जमीन का भी बनेगा ‘आधार’, हर प्लॉट को मिलेगा 14 अंकों का यूनिक नंबर; डिजिटल होगा नक्शा, रजिस्ट्रेशन और पूरा रिकॉर्ड

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नई दिल्ली: देश में अब जमीन की पहचान भी एक यूनिक नंबर के जरिए की जाएगी। सरकार ने जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल और एकीकृत करने के लिए डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) 3.0 की शुरुआत की है। इसके तहत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की जमीनों के रिकॉर्ड, नक्शे, रजिस्ट्रेशन और अन्य जानकारियों को GIS आधारित डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जाएगा। गुरुवार को योजना के तीसरे चरण की विस्तृत गाइडलाइन जारी की गई।

DILRMP 3.0 के लिए 2026 से 2031 तक 565.5 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। सरकार का उद्देश्य अलग-अलग विभागों और प्रणालियों में मौजूद भूमि संबंधी डेटा को एक ही प्लेटफॉर्म से जोड़कर यूनिफाइड लैंड मैनेजमेंट सिस्टम तैयार करना है। इससे लोगों के लिए जमीन के रिकॉर्ड तक पहुंच आसान होने और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने योजना के शुभारंभ के दौरान कहा कि यह पहल केवल व्यक्तिगत भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक एकीकृत भूमि प्रबंधन व्यवस्था तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को संस्थागत ऋण लेने में आसानी होगी और उन्हें सरकारी कार्यालयों के चक्कर भी कम लगाने पड़ेंगे। चौहान ने कहा कि भूमि सिर्फ मिट्टी का टुकड़ा नहीं है, बल्कि किसानों का गौरव, पूर्वजों का आशीर्वाद और आने वाली पीढ़ियों की पहचान है।

हर जमीन को मिलेगा 14 अंकों का यूनिक नंबर

DILRMP 3.0 के तहत देश की प्रत्येक जमीन को 14 अंकों का यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर देने की योजना है। इस नंबर से किसी संपत्ति की अलग और स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। साथ ही जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी पर रोक लगाने में भी यह व्यवस्था उपयोगी मानी जा रही है।

GIS आधारित ‘लैंड स्टैक’ तैयार होगा

योजना के तहत GIS आधारित ‘लैंड स्टैक’ विकसित किया जाएगा। यह एक एकीकृत डिजिटल ढांचा होगा, जिसमें जियो-रेफरेंस्ड कैडस्ट्रल मैप, भूमि अधिकारों के रिकॉर्ड, संपत्ति पंजीकरण और जमीन से जुड़े अदालती मामलों की जानकारी एक साथ उपलब्ध होगी।

राज्य API के माध्यम से अपने अलग-अलग भूमि डेटासेट और प्रणालियों को आपस में जोड़कर अपना स्टेट लैंड स्टैक तैयार कर सकेंगे। आगे यही राज्य स्तरीय स्टैक नेशनल लैंड स्टैक का आधार बनेंगे। इससे संबंधित अधिकारियों को डेटा और उसके प्रबंधन पर नियंत्रण भी मिलेगा।

75 सब-रजिस्ट्रार कार्यालय होंगे आधुनिक

पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर देश के अधिक भीड़ वाले 75 सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को आधुनिक बनाने की योजना है। इन कार्यालयों को डिजिटल सुविधाओं से लैस सेवा केंद्र के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य जमीन और संपत्ति के रजिस्ट्रेशन से जुड़ी सेवाओं को ज्यादा सुविधाजनक और व्यवस्थित बनाना है।

पुराने जमीन रिकॉर्ड भी होंगे डिजिटल

पुश्तैनी जमीन और संपत्ति से जुड़े विवादों को कम करने तथा विरासत के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए पुराने रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड को व्यवस्थित तरीके से स्कैन किया जाएगा। इन दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर पुराने रिकॉर्ड आसानी से हासिल किए जा सकें।

डिजिटल रजिस्ट्रेशन रिपॉजिटरी बनेगी

योजना के तहत एक सुरक्षित डिजिटल रजिस्ट्रेशन रिपॉजिटरी भी विकसित की जाएगी। इसमें पंजीकृत दस्तावेजों के साथ संपत्ति से जुड़ी देनदारियों और ऋण की जानकारी भी उपलब्ध होगी। इससे जमीन के स्वामित्व की जांच, पुराने खरीद-बिक्री रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े जरूरी सत्यापन को आसान बनाने में मदद मिलेगी।

राजस्व न्यायालय होंगे पेपरलेस

राजस्व न्यायालय मामला प्रबंधन प्रणाली (RCCMS) को आधुनिक बनाकर सीधे भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। इससे राजस्व मामलों की निगरानी और उनके निपटारे की प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिलेगी। खास तौर पर म्यूटेशन से जुड़े मामलों के जल्द निपटारे और लंबित मामलों की संख्या कम करने का लक्ष्य रखा गया है।

शहरों में GIS आधारित जमीन का नक्शा

शहरी क्षेत्रों में NAKSHA पायलट प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके तहत सटीक और GIS आधारित शहरी भूमि रिकॉर्ड तैयार किए जाएंगे। साथ ही शहरी संपत्तियों के लिए Urban Property Card (UrPro Card) जारी किए जाएंगे। इससे शहरों में जमीन और संपत्तियों की डिजिटल पहचान मजबूत करने के साथ रिकॉर्ड प्रबंधन को भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

 

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