हूती विद्रोहियों के खतरे के बीच सऊदी अरब की सैन्य ताकत बढ़ा रहा पाकिस्तान, मिसाइलें और ड्रोन भेजने की खबर

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इस्लामाबाद: यमन के हूती विद्रोहियों से जुड़े सुरक्षा खतरों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ अपना सैन्य सहयोग बढ़ा दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद ने रियाद को वायु रक्षा प्रणालियों, मिसाइलों, रॉकेट और पाकिस्तान में निर्मित ड्रोन की नई खेप भेजी है। इसके साथ ही सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती भी बढ़ाई जा रही है। बताया जा रहा है कि इस कदम का मकसद सऊदी अरब के प्रमुख शहरों और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा को मजबूत करना है।

छोटे-छोटे समूहों में सऊदी अरब भेजे जा रहे पाकिस्तानी सैनिक

CNN-News18 की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पाकिस्तानी सैनिकों को लगातार छोटे समूहों में सऊदी अरब भेजा जा रहा है। सैन्य उपकरणों की आपूर्ति के लिए पाकिस्तान वायुसेना के परिवहन विमानों और सैन्य मालवाहक उड़ानों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान वायुसेना का आईएल-78 हवाई ईंधन भरने वाला विमान भी सऊदी हवाई क्षेत्र में पहुंचा था। हालांकि, सैनिकों की कुल संख्या, तैनाती के स्थान और इस सैन्य अभियान के पूरे दायरे को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच सैन्य सहयोग नया नहीं है। पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी अरब में सैन्य कर्मियों की मौजूदगी बनाए रखता आया है। इस सहयोग में प्रशिक्षण और अन्य रक्षा गतिविधियां भी शामिल रही हैं।

2025 के रक्षा समझौते के तहत बढ़ा सहयोग

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से सैन्य उपकरणों की आपूर्ति सितंबर 2025 में दोनों देशों के बीच हुए रणनीतिक आपसी रक्षा समझौते (एसएमडीए) के तहत की जा रही है।

इस समझौते के तहत दोनों देशों ने कहा था कि किसी एक देश के खिलाफ होने वाला हमला दोनों के खिलाफ हमला माना जाएगा। इसे पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों को औपचारिक रूप देने की दिशा में अहम कदम माना गया था।

ताजा सैन्य सहायता में कथित तौर पर शामिल ड्रोन, मिसाइल, रॉकेट और वायु रक्षा प्रणालियां सऊदी अरब की हवाई सुरक्षा को मजबूत करने में इस्तेमाल की जा सकती हैं। हालांकि, इन उपकरणों की सटीक संख्या, प्रकार और तैनाती से जुड़ी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

हूती विद्रोहियों से जुड़े खतरे के बीच सऊदी अरब की तैयारी

यमन के हूती विद्रोहियों और क्षेत्रीय संघर्षों से जुड़े सुरक्षा जोखिमों के कारण सऊदी अरब को अपने शहरों, सैन्य प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर ध्यान देना पड़ रहा है। संभावित हवाई हमलों से निपटने के लिए वायु रक्षा प्रणालियों और निगरानी क्षमताओं का महत्व बढ़ जाता है।

पाकिस्तान की ओर से सैन्य सहायता बढ़ाए जाने की खबर ऐसे समय में आई है, जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा समीकरण लगातार बदल रहे हैं। इस्लामाबाद और रियाद के बीच मजबूत रक्षा सहयोग दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को भी दर्शाता है।

हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट से यह स्पष्ट नहीं है कि भेजे गए हथियारों और उपकरणों का इस्तेमाल किसी विशिष्ट खतरे के जवाब में किया जाएगा या यह व्यापक रक्षा तैयारियों का हिस्सा है।

यमन संकट के राजनीतिक समाधान पर भी पाकिस्तान का जोर

सैन्य सहयोग बढ़ाने के साथ पाकिस्तान ने यमन संकट का बातचीत के जरिए राजनीतिक समाधान निकालने की जरूरत पर भी जोर दिया है। यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष का असर क्षेत्रीय सुरक्षा और मानवीय हालात पर पड़ता रहा है।

सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग पाकिस्तान के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, वहीं रियाद के लिए यह साझेदारी अपनी सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने का एक अतिरिक्त माध्यम हो सकती है।

फिलहाल, पाकिस्तान की ओर से सैन्य सहायता बढ़ाए जाने का क्षेत्रीय सुरक्षा पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। सैनिकों की तैनाती के वास्तविक पैमाने और हथियारों की आपूर्ति से संबंधित विवरण सामने आने के बाद ही इस कदम के व्यापक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।

 

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