भारत-पाक संघर्ष पर ट्रंप के दावे के बीच रूबियो का बड़ा बयान, बोले- मौजूदा वैश्विक व्यवस्था बड़े संघर्ष रोकने में नाकाम

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वाशिंगटन: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के दौरान मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक संस्थाएं अपने मूल उद्देश्य से आगे बढ़ गई हैं और दुनिया के बड़े संघर्षों को सुलझाने में प्रभावी साबित नहीं हो रही हैं। रूबियो ने भारत-पाकिस्तान के बीच संभावित संघर्ष का भी उदाहरण दिया।

रूबियो के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र में मौजूद कई नेताओं ने भी मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के कामकाज को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था अपने मूल उद्देश्य से आगे बढ़ चुकी है और ऐसे कई मुद्दों में शामिल हो गई है, जो उसके दायरे में नहीं आते। उनके अनुसार, इसका नतीजा यह है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने की क्षमता प्रभावित हुई है।

भारत-पाकिस्तान का भी किया जिक्र

रूबियो ने कहा कि अगर प्रभावी तरीके से काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था मौजूद होती तो विभिन्न देशों के बीच बढ़ते तनाव से निपटने में मदद मिल सकती थी। उन्होंने भारत-पाकिस्तान के साथ थाईलैंड-कंबोडिया के बीच संघर्ष का भी उदाहरण दिया। रूबियो ने यह टिप्पणी ऐसे समय की है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान वैश्विक संघर्षों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा हो रही है।

रूबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को खत्म करने की बात नहीं कर रहे हैं। उनके मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था को उसके मूल उद्देश्यों और भूमिका की ओर वापस ले जाने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अमेरिकी हितों से ऊपर नहीं रखेगा।

भारत-पाक सीजफायर पर ट्रंप का क्या दावा था

मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव बढ़ने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 मई को दोनों देशों के बीच तत्काल सीजफायर की घोषणा किए जाने की जानकारी दी थी। ट्रंप ने इसे अमेरिकी प्रयासों से जोड़ते हुए सार्वजनिक रूप से इसका श्रेय लिया था।

हालांकि, भारत की ओर से बाद में यह स्पष्ट किया गया कि सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे सैन्य स्तर पर हुई बातचीत के बाद हुआ था। तत्कालीन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिकी दबाव या मध्यस्थता की भूमिका से इनकार किया था। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा था कि दोनों देशों के बीच सैन्य अभियानों को रोकने के लिए बातचीत हुई थी।

इस पृष्ठभूमि में रूबियो का मौजूदा बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने खुद भारत-पाकिस्तान जैसे संभावित संघर्षों का उदाहरण देते हुए मौजूदा वैश्विक व्यवस्था की सीमाओं पर सवाल उठाए हैं।

 

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