भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता मुश्किल दौर में, निर्मला सीतारमण बोलीं- आगे बढ़ना दोनों पक्षों के लिए आसान नहीं
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता अभी जारी है, लेकिन बातचीत ऐसे पड़ाव पर पहुंच गई है, जहां आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है, जबकि अमेरिका अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है।
राष्ट्रीय राजधानी में म्यूनिख लीडर्स मीटिंग 2026 में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच बेहद कठिन और गहन बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि बातचीत अभी भी जारी है, लेकिन दोनों पक्ष ऐसे मुकाम पर पहुंच गए हैं, जहां कुछ देना या लेना दोनों के लिए काफी मुश्किल हो सकता है।
आगे बातचीत की गुंजाइश तलाश रहे दोनों देश
निर्मला सीतारमण ने कहा कि दोनों देश अब भी यह तलाश सकते हैं कि आगे बातचीत की कोई गुंजाइश बाकी है या नहीं। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है और अमेरिका अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है।
वित्त मंत्री के मुताबिक, अमेरिका की चिंता की वजह वर्षों से भारत के साथ होने वाले व्यापार में नुकसान होना है। दोनों देशों के बीच यह बातचीत फरवरी 2026 में घोषित अंतरिम व्यापार समझौते के लिए तय रूपरेखा के तहत हो रही है।
अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने पर भी काम जारी
भारत और अमेरिका ने कहा था कि दोनों देश व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखते हुए अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे। इसी बीच वित्त मंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए व्यापार समझौते को व्यापार समझौतों को लेकर भारत के दृष्टिकोण के उदाहरण के तौर पर पेश किया।
उन्होंने कहा कि यह समझौता करीब दो अरब लोगों और वैश्विक जीडीपी के लगभग एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाली अर्थव्यवस्थाओं को कवर करेगा।
भारत-ईयू समझौते को बताया ‘सभी समझौतों की जननी’
निर्मला सीतारमण ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के इस्तेमाल किए गए वाक्यांश का जिक्र करते हुए कहा कि इसे “सभी समझौतों की जननी” कहना उचित होगा।
उन्होंने बताया कि समझौते के तहत भारत ने अपनी 92.5 प्रतिशत टैरिफ लाइनों और व्यापार मूल्य के करीब 97 प्रतिशत हिस्से को खोल दिया है। वहीं, यूरोपीय संघ ने व्यापार मूल्य के करीब 99 प्रतिशत और लगभग 97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को खोला है।
भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को ध्यान में रखकर तय हुई बाजार पहुंच
वित्त मंत्री ने कहा कि बाजार पहुंच से जुड़ी प्रतिबद्धताओं का चयन दोनों अर्थव्यवस्थाओं की पूरकता को ध्यान में रखकर किया गया है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।





