फ्रांस के हेनरी बी. कगन और जापान के केन्सो सोआई को केमिस्ट्री का नोबेल, 100 साल पुरानी गुत्थी सुलझाने में अहम योगदान

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नई दिल्ली: फ्रांस के हेनरी बी. कगन और जापान के केन्सो सोआई को रसायन विज्ञान के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने दोनों वैज्ञानिकों को “असिमेट्रिक ऑर्गेनिक सिंथेसिस इन नॉन-लीनियर इफेक्ट्स और ऑटो-कैटालिसिस की खोज” के लिए यह पुरस्कार दिया है। दोनों वैज्ञानिकों ने रसायन विज्ञान में अणुओं के दर्पण-प्रतिबिंब वाले रूपों में से किसी एक को चुनने की प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण काम किया है।

इस खोज के जरिए करीब 100 साल पुरानी उस वैज्ञानिक गुत्थी को समझने में मदद मिली कि किसी रासायनिक प्रक्रिया में एक-दूसरे की दर्पण-छवि जैसे दो अणुओं में से केवल एक रूप को कैसे बनाया जा सकता है। यह खोज दवाओं के साथ-साथ कई तरह के रसायनों के निर्माण में अहम भूमिका निभा सकती है।

बाएं-दाएं हाथ जैसा होता है अणुओं का मामला

नोबेल समिति के एक सदस्य ने प्रयोग के जरिए इस खोज को आसान भाषा में समझाने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि हमारे दोनों हाथ देखने में लगभग एक जैसे होते हैं, लेकिन बायां हाथ दाएं हाथ की जगह नहीं ले सकता। कुछ अणु भी इसी तरह होते हैं। उनके दो रूप होते हैं और दोनों एक-दूसरे की दर्पण-छवि होते हैं।

समस्या तब पैदा होती है जब वैज्ञानिक ऐसे अणु तैयार करते हैं। कई बार रासायनिक प्रक्रिया में दोनों रूप एक साथ बन जाते हैं। ऐसे में वैज्ञानिकों के लिए जरूरी अणु को अलग रूप में तैयार करना मुश्किल हो जाता है।

दवा का एक रूप फायदेमंद, दूसरा नुकसानदेह हो सकता है

किसी दवा का एक अणु शरीर में बीमारी पर प्रभावी तरीके से काम कर सकता है, जबकि उसका दर्पण-प्रतिबिंब वाला दूसरा रूप शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसी वजह से वैज्ञानिक ऐसी प्रक्रिया विकसित करना चाहते थे, जिसमें जरूरत वाला अणु ही तैयार हो।

यह समस्या केवल दवाओं तक सीमित नहीं है। मानव शरीर में भी इसका उदाहरण मिलता है। अमीनो एसिड के दो दर्पण-प्रतिबिंब वाले रूप हो सकते हैं, लेकिन शरीर प्रोटीन बनाने के लिए इनमें से केवल एक रूप का इस्तेमाल करता है।

1986 में कगन ने खोजा नया तरीका

हेनरी बी. कगन ने 1986 में रासायनिक प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने का एक नया तरीका खोजा। इसके जरिए दर्पण-प्रतिबिंब वाले रूपों में से किसी एक की अधिक मात्रा तैयार करना संभव हुआ। उनकी इस खोज को उन रसायनविदों के लिए क्रांतिकारी माना गया, जो दवाइयों, स्वाद, खुशबू और नए पदार्थ तैयार करने के लिए रासायनिक प्रतिक्रियाएं विकसित करते हैं।

इसके बाद केन्सो सोआई ने इस काम को आगे बढ़ाया। उन्होंने ऐसी रासायनिक प्रतिक्रिया तैयार की, जिसमें संभावित दर्पण-प्रतिबिंब वाले रूपों में से केवल एक ही रूप बनता था। यही रूप आगे अपने जैसे और अणु बनाने में मदद करता है।

दिसंबर में स्टॉकहोम में मिलेगा सम्मान

नोबेल पुरस्कार के विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। वर्ष 2026 में नोबेल पुरस्कार की राशि करीब 11.5 करोड़ रुपये है।

6 अक्टूबर से अलग-अलग क्षेत्रों में नोबेल पुरस्कारों की घोषणाएं हो रही हैं। मंगलवार को बेल्जियम के वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन को 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया। उन्हें यह सम्मान अंतरिक्ष से धरती तक आने वाले बेहद ताकतवर न्यूट्रिनो को पकड़ने और उनके बारे में जानकारी जुटाने में अहम योगदान के लिए दिया गया है।

 

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