डेंगू के इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, पेट दर्द से खून आने तक खतरे की घंटी; तुरंत पहुंचें अस्पताल
कब खतरनाक रूप ले सकता है डेंगू?
डेंगू वायरस के चार प्रमुख प्रकार या सीरोटाइप होते हैं। कुछ मामलों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, जिसे गंभीर डेंगू कहा जाता है। इसके गंभीर रूपों में डेंगू हेमरेजिक फीवर और डेंगू शॉक सिंड्रोम शामिल हैं। हालांकि, हर डेंगू मरीज में ऐसी स्थिति नहीं बनती, लेकिन गंभीर डेंगू किसी को भी हो सकता है और बच्चों में इसका खतरा विशेष रूप से चिंता का विषय है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, शुरुआती संकेतों की पहचान और समय पर उचित इलाज से गंभीर डेंगू के कारण होने वाली मौतों का जोखिम काफी कम किया जा सकता है।
डेंगू के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
डेंगू की शुरुआत में आमतौर पर ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
- तेज बुखार
- सिरदर्द और आंखों के पीछे दर्द
- मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द
- थकान और कमजोरी
- मितली या उल्टी
- त्वचा पर लाल चकत्ते
- भूख कम लगना
इन लक्षणों के दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। केवल लक्षणों के आधार पर डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती, इसके लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है।
इन गंभीर संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
डेंगू के लक्षण शुरू होने के कुछ दिनों बाद, खासकर बुखार उतरने के आसपास, मरीज की हालत गंभीर हो सकती है। ऐसे में निम्नलिखित संकेत दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल जाना चाहिए:
- पेट में तेज दर्द या लगातार पेट दर्द बने रहना
- बार-बार या लगातार उल्टी होना
- तेजी से सांस लेना या सांस लेने में परेशानी
- उल्टी या मल में खून आना
- नाक या मसूड़ों से खून बहना
- पेशाब में खून दिखाई देना
- पेट या शरीर में तरल पदार्थ जमा होने के संकेत
- अत्यधिक सुस्ती, बेचैनी या असामान्य व्यवहार
- अचानक कमजोरी बढ़ना या बेहोशी जैसी स्थिति
इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो घर पर इंतजार न करें। मरीज को तुरंत चिकित्सा सहायता दिलाएं। गंभीर डेंगू में तेजी से इलाज शुरू करना बेहद जरूरी होता है।
गंभीर डेंगू में शरीर को क्या नुकसान हो सकता है?
गंभीर डेंगू में रक्त वाहिकाओं से प्लाज्मा का रिसाव हो सकता है, जिससे शरीर में रक्त संचार प्रभावित होने लगता है। कुछ मरीजों में रक्तस्राव, सांस लेने में परेशानी और लिवर, हृदय या अन्य अंगों को नुकसान पहुंचने जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।
गंभीर स्थिति में रक्तचाप अचानक गिर सकता है और मरीज शॉक में जा सकता है। समय पर इलाज न मिलने पर कई अंगों के काम करना बंद करने और मृत्यु का खतरा बढ़ सकता है। पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों में चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
गंभीर डेंगू का इलाज कैसे होता है?
डेंगू के वायरस को खत्म करने वाली कोई विशेष प्रमाणित दवा उपलब्ध नहीं है। गंभीर डेंगू के मरीज को अस्पताल में भर्ती करने और जरूरत पड़ने पर गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में रखने की आवश्यकता हो सकती है।
मरीज की स्थिति के अनुसार डॉक्टर नसों के जरिए तरल पदार्थ, ऑक्सीजन और अन्य जरूरी उपचार दे सकते हैं। रक्त या प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत कुछ विशेष परिस्थितियों में पड़ सकती है। यह फैसला मरीज की हालत और चिकित्सकीय जांच के आधार पर लिया जाता है। इलाज में देरी होने पर गंभीर जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है।
हल्के डेंगू में किन बातों का रखें ध्यान?
अगर डॉक्टर ने डेंगू की पुष्टि की है और मरीज की हालत गंभीर नहीं है, तो उनकी सलाह के अनुसार घर पर देखभाल की जा सकती है। इस दौरान कुछ जरूरी सावधानियां अपनाएं:
- पर्याप्त आराम करें और शरीर में पानी की कमी न होने दें।
- पानी, ओआरएस और अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ लेते रहें।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरी जांच और निगरानी कराएं।
- बुखार या दर्द की दवा डॉक्टर से पूछकर ही लें। एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाएं रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं, इसलिए इनसे बचें।
- पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, खून आने, सांस की परेशानी या अत्यधिक सुस्ती जैसे संकेत मिलें तो तुरंत अस्पताल जाएं।
नारियल पानी और संतुलित भोजन शरीर में तरल पदार्थ तथा पोषण की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इनके सेवन से प्लेटलेट्स बढ़ने या डेंगू ठीक होने की गारंटी नहीं है। गिलोय, पपीता या अन्य घरेलू उपायों को डॉक्टर के इलाज का विकल्प न बनाएं।





